बिहार की सियासत में एक बार फिर तेज प्रताप यादव सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं बल्कि एक एफआईआर है. जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि उन्होंने नामांकन रैली के दौरान अपनी निजी गाड़ी पर पुलिस का स्टीकर, सायरन और लाइट लगाकर न सिर्फ नियमों की अनदेखी की, बल्कि खुलेआम चुनाव आयोग की गाइडलाइन को भी नजरअंदाज किया.
वायरल वीडियो बना कार्रवाई की वजह
यह पूरा मामला उस वक्त तूल पकड़ गया जब तेज प्रताप यादव की रैली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति उनकी पार्टी का झंडा लहराते हुए पुलिस स्कॉर्ट के साथ चलता दिखाई दे रहा है. वीडियो के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए. महुआ के अंचलाधिकारी मनी कुमार वर्मा के आदेश पर तेज प्रताप के खिलाफ महुआ थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.
निजी गाड़ी पर सरकारी पहचान
चुनाव आयोग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि कोई भी उम्मीदवार प्रचार या रैली के दौरान पुलिस वाहन या स्कॉर्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकता. तेज प्रताप की प्राइवेट गाड़ी पर लगे पुलिस स्टीकर, सायरन और लाइट ने न सिर्फ नियम तोड़े बल्कि सवाल भी खड़े कर दिए. इसी सिलसिले में पुलिस ने उनके सरकारी आवास पर छापेमारी भी की, ताकि मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके.
16 अक्टूबर को किया नामांकन
आरजेडी से निष्कासित होने के बाद तेज प्रताप यादव ने हाल ही में अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) की स्थापना की थी. 16 अक्टूबर को उन्होंने वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया. इस दौरान वे अपनी दादी की तस्वीर लेकर पहुंचे और एक अलग ही भावनात्मक छवि पेश की.
21 सीटों पर उतारी पार्टी
जनशक्ति जनता दल ने बिहार चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अब तक 21 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. खुद तेज प्रताप यादव महुआ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो कभी उनका गढ़ माना जाता था. हालांकि इस बार उनका सफर इतना आसान नहीं लग रहा, खासकर तब जब चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला उनके सिर पर मंडरा रहा है.
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