नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है. जहां अब तक माना जाता रहा है कि इस तकनीकी दौड़ में अमेरिका और चीन सबसे आगे हैं, वहीं 2025 की AI सुपरपावर रैंकिंग में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है. इस लिस्ट में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है, जबकि अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है.
वैश्विक स्तर पर AI क्षमताओं का विश्लेषण करने वाली प्रतिष्ठित संस्था टेक्नोलॉजी रिसोर्स ग्रुप (TRG) द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब AI पावरहाउस बनने की दिशा में चीन से आगे निकल चुका है. रिपोर्ट में जिन कारकों के आधार पर देशों की रैंकिंग की गई, उसमें सुपरकंप्यूटिंग पावर, AI कंपनियों की सक्रियता, सरकार की तैयारी और बिजली की उपलब्धता जैसे अहम पहलुओं को शामिल किया गया.
AI सुपरपावर रैंकिंग 2025: टॉप 10 देश
रिपोर्ट में जिन देशों को शीर्ष 10 में शामिल किया गया, वे इस प्रकार हैं:
यह सूची इस बात को दर्शाती है कि सिर्फ आर्थिक या जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि AI इन्फ्रास्ट्रक्चर, गवर्नमेंट पॉलिसीज, और तकनीकी इनोवेशन अब किसी देश की असली ताकत का पैमाना बनते जा रहे हैं.
भारत बनाम चीन: कंप्यूटिंग क्षमता में भारत आगे
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि भारत ने चीन को AI की आधारभूत क्षमता में पीछे छोड़ दिया है.
भारत की कुल कंप्यूटिंग पावर:
लगभग 1.2 मिलियन H100-इक्विवेलेंट मेगाबाइट, जो कि वर्तमान में AI मॉडल्स को ट्रेन करने में उपयोग हो रही NVIDIA H100 चिप्स पर आधारित है.
चीन की कंप्यूटिंग पावर:
लगभग 4 लाख H100-इक्विवेलेंट मेगाबाइट, जो भारत की तुलना में 66% कम है.
भारत की विद्युत क्षमता:
1,100 मेगावाट, जो कि AI सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए पर्याप्त है.
चीन की विद्युत क्षमता:
289 मेगावाट, जो भारत के मुकाबले चार गुना कम है.
इन आँकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि भारत न केवल AI के तकनीकी ढांचे में निवेश कर रहा है, बल्कि इसके संचालन के लिए जरूरी ऊर्जा संसाधनों में भी चीन से आगे निकल चुका है.
अमेरिका का दबदबा क्यों बरकरार है?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का AI में दबदबा अभूतपूर्व कंप्यूटिंग शक्ति और ऊर्जा संसाधनों के चलते बना हुआ है.
अमेरिका की कंप्यूटिंग पावर:
लगभग 39.7 मिलियन H100 इक्विवेलेंट मेगाबाइट, जो बाकी देशों से कई गुना अधिक है.
बिजली क्षमता:
19,800 मेगावाट, जो इसे किसी भी बड़े AI मॉडल को चलाने, प्रशिक्षित करने और इनोवेशन का केंद्र बनाने के लिए आदर्श बनाता है.
इसके साथ ही अमेरिका में OpenAI, Google DeepMind, Anthropic, NVIDIA जैसे अग्रणी AI संस्थान और कंपनियां कार्यरत हैं, जो इसे वैश्विक AI नेता बनाते हैं.
UAE और सऊदी अरब की चौंकाने वाली छलांग
रैंकिंग में अमेरिका के बाद दूसरे और तीसरे स्थान पर UAE और सऊदी अरब का आना तकनीकी जगत के लिए आश्चर्यजनक है. इन देशों ने हाल के वर्षों में AI में भारी निवेश, टैलेंट आयात और स्थानीय तकनीकी इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया है.
UAE में अबू धाबी AI हब, G42, और MBZUAI जैसी पहलें इसके उन्नति का प्रमाण हैं, वहीं सऊदी अरब का Vision 2030 मिशन तकनीकी नवाचार को लेकर बेहद आक्रामक और गंभीर है.
रैंकिंग के पीछे कौन-से मापदंड हैं?
TRG की रिपोर्ट सिर्फ किसी देश की GDP या जनसंख्या के आधार पर नहीं बनाई गई, बल्कि इसके पीछे कई विश्लेषणात्मक मानदंड शामिल हैं:
इन सभी मानकों के आधार पर एक समग्र स्कोर तैयार किया गया, जिससे यह रैंकिंग बनी है.
भारत की AI यात्रा: तेज़ी से आगे बढ़ता कदम
क्या चीन वाकई पिछड़ रहा है?
हालांकि चीन ने लंबे समय तक AI क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और AI चिप्स की आपूर्ति में आई कमी ने इसकी रफ्तार को धीमा कर दिया है.
NVIDIA और AMD जैसी कंपनियों पर चीन को चिप्स बेचने की पाबंदियों ने वहां के AI मॉडल्स की प्रगति को प्रभावित किया है. OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने पहले ही आगाह किया था कि चीन को हल्के में नहीं लेना चाहिए, लेकिन TRG की रिपोर्ट फिलहाल अलग तस्वीर पेश कर रही है.
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