'आतंकवाद पर UNSC की निष्क्रियता गंभीर चिंता का विषय', संयुक्त राष्ट्र में भारत ने किया पाकिस्तान का पर्दाफाश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर कर दिया है. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने खुलासा किया कि पाकिस्तान ने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को बचाने की कोशिश की थी.

Foreign Minister jaishankar takes a jibe at pakistan over terror response
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर कर दिया है. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने खुलासा किया कि पाकिस्तान ने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को बचाने की कोशिश की थी. इस घटना पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब सुधारों की कमी के कारण सुरक्षा परिषद का काम ठप पड़ जाए, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है.

विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा स्थिति “संतोषजनक नहीं” है. उन्होंने कहा कि वैश्विक बहसें अब “ध्रुवीकृत” हो चुकी हैं और सुधार प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है. जयशंकर ने कहा, “जब एक मौजूदा सुरक्षा परिषद सदस्य पहलगाम जैसे क्रूर आतंकी हमले के जिम्मेदार संगठन को खुलकर बचाता है, तो यह बहुपक्षीयता की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है.” भले ही उन्होंने पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से साफ था कि निशाना उसी देश पर था जिसने UNSC के प्रेस बयान से TRF का नाम हटाने की कोशिश की थी.

पहलगाम हमले पर विवाद ,TRF को बचाने की कोशिश

जुलाई में जारी UNSC की एक रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी आतंकी इकाई TRF का नाम पहलगाम हमले के संदर्भ में दर्ज किया गया था. लेकिन पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में इस संगठन का उल्लेख हटाने के लिए दबाव बनाया. TRF ने हमले की जिम्मेदारी खुद ली थी, फिर भी पाकिस्तान ने इसे छिपाने का प्रयास किया. भारत ने इस रवैये को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई के लिए “खतरे की घंटी” बताया.

आतंकियों और पीड़ितों को समान मानना शर्मनाक

विदेश मंत्री ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर कोई वैश्विक रणनीति के नाम पर आतंकवाद के पीड़ितों और अपराधियों को एक समान मानता है, तो यह नैतिक दिवालियापन है. जो खुद को आतंकवादी घोषित करते हैं, उन्हें प्रतिबंधों से बचाया जाता है — यह बहुपक्षीय संस्थाओं की ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न है.” उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने मूल उद्देश्य – अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा – को पूरा करने में नाकाम होता जा रहा है.

सुधार जरूरी, वरना संयुक्त राष्ट्र का अस्तित्व दांव पर

जयशंकर ने कहा कि सुधारों की कमी के कारण UNSC जैसी संस्थाएं निष्क्रिय हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, “किसी भी सार्थक सुधार को उसी प्रक्रिया के नाम पर रोका जा रहा है जो सुधार लाने के लिए बनी थी. यह स्थिति अब बदलनी ही चाहिए.” उन्होंने आगाह किया कि यदि संयुक्त राष्ट्र केवल औपचारिक बहसों तक सीमित रह गया, तो विकास और सामाजिक प्रगति का एजेंडा भी ठहर जाएगा.

ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मिलना चाहिए उचित स्थान

भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की धीमी रफ्तार ग्लोबल साउथ देशों की कठिनाइयों का प्रतीक है. व्यापारिक असमानताएं, आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता और राजनीतिक दबाव जैसी समस्याएं दक्षिणी देशों के विकास में बड़ी बाधा बन चुकी हैं.

आशा बरकरार है, लेकिन सुधारों से ही बनेगा भविष्य

अपने संबोधन के अंत में जयशंकर ने कहा, “हम निराश नहीं हैं. 80 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा पर हमें यह स्वीकार करना होगा कि कितनी भी चुनौतियाँ क्यों न हों, बहुपक्षवाद के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अडिग रहनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र में खामियां हैं, लेकिन संकट के इस समय में दुनिया को इसे मजबूत करना ही होगा.”

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