यूक्रेन संकट को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनातनी अब और गहराती दिख रही है. रूस ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह पश्चिमी देशों की सीजफायर की अपीलों को अब गंभीरता से नहीं लेता. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को मॉस्को में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि रूस अब “युद्धविराम के खोखले नारों” से प्रभावित नहीं होगा.
हम पुराने धोखे देख चुके हैं रूस ने जताई नाराजगी लावरोव ने साफ शब्दों में कहा, कि हम पहले भी ऐसे हालात से गुजर चुके हैं, जहां युद्धविराम का दिखावा कर समय लिया गया और फिर उन्हीं नीतियों को दोहराया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियार देकर न केवल रूस के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को भी खतरे में डाल रहे हैं.
एकतरफा मांगें, हमारी सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया
रूसी विदेश मंत्री ने पश्चिम पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूक्रेन मुद्दे पर उठाई जा रही अधिकांश मांगें केवल रूस पर दबाव बनाने के लिए हैं, जबकि रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है. लावरोव ने कहा, रूस अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए किसी भी कदम से पीछे नहीं हटेगा. हम किसी भी कीमत पर अपने रणनीतिक उद्देश्यों से समझौता नहीं करेंगे."
नाटो के विस्तार पर भी हमला, वैश्विक अस्थिरता की चेतावनी
लावरोव ने नाटो के विस्तार को "रूस के खिलाफ सीधा उकसावा" बताया और कहा कि यह नीति न केवल असंतुलन पैदा कर रही है, बल्कि भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत भी दे रही है. इस बीच, पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लावरोव ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को और गहरा देंगे.
हमें भी गंभीरता से लिया जाए
हालांकि, लावरोव ने यह स्पष्ट किया कि रूस संवाद के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं कर रहा, लेकिन यह तभी संभव है जब पश्चिम रूस की चिंताओं को गंभीरता से ले और कोई भी वार्ता संतुलन और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हो.
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