'हम मान चुके थे कि भारत-पाकिस्तान के बीच जंग होगी...' संसद हमले पर पूर्व CIA अधिकारी का बड़ा खुलासा

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जॉन किरियाकू (John Kiriakou) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है.

Former CIA officers big revelation on Indian Parliament attack
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नई दिल्ली: अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जॉन किरियाकू (John Kiriakou) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया है कि 2001 में संसद हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि दोनों देश युद्ध के बिलकुल कगार पर पहुंच गए थे.

किरियाकू के अनुसार, यह स्थिति ऑपरेशन पराक्रम (Operation Parakram) के दौरान बनी थी, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान सीमा पर भारी सैन्य जमावड़ा किया था. उस समय अमेरिका को यह डर था कि दक्षिण एशिया में एक और बड़ा युद्ध छिड़ सकता है, जो संभवतः परमाणु संघर्ष में बदल सकता था.

हम मान चुके थे कि युद्ध होने वाला है- CIA

एक इंटरव्यू में जॉन किरियाकू ने बताया, "हम पूरी तरह से आश्वस्त थे कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होने जा रहा है. स्थिति इतनी गंभीर थी कि हमने इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिकी अधिकारियों के परिवारों को तत्काल बाहर निकाल लिया था."

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2001 में हुए भारतीय संसद हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर था कि किसी भी छोटी गलती से युद्ध शुरू हो सकता है.

इस स्थिति से निपटने के लिए अमेरिका के उस समय के उप विदेश मंत्री (Deputy Secretary of State) को बार-बार दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच दौड़ लगानी पड़ी ताकि किसी तरह दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव टल सके.

अमेरिका की प्राथमिकता था अल-कायदा

जॉन किरियाकू ने बताया कि उस समय अमेरिका का पूरा ध्यान 9/11 आतंकी हमलों के बाद अल-कायदा और अफगानिस्तान पर केंद्रित था. इसलिए वाशिंगटन में भारत की सुरक्षा चिंताओं को वह गंभीरता नहीं दी गई जिसकी जरूरत थी.

उन्होंने बताया, "हम अल-कायदा को लेकर इतने व्यस्त थे कि भारत के बारे में दो बार भी नहीं सोचा. भारत के प्रति उस दौर में अमेरिकी नीति उपेक्षापूर्ण थी, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण दे रहा था."

किरियाकू का मानना है कि यदि अमेरिका ने उस समय पाकिस्तान पर सख्त रुख अपनाया होता, तो दक्षिण एशिया में आतंकवाद की जड़ें इतनी गहरी नहीं होतीं.

मुंबई हमलों पर भी किया खुलासा

2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) को लेकर भी जॉन किरियाकू ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को शुरू से ही पता था कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी आतंकवादी संगठन शामिल थे, न कि अल-कायदा.

उन्होंने कहा, "हमें शुरू से स्पष्ट था कि 26/11 अल-कायदा का काम नहीं था. इसके पीछे पाकिस्तान-समर्थित आतंकी नेटवर्क शामिल थे, जो भारत में आतंक फैलाने के लिए तैयार किए गए थे."

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वर्षों से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कभी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की.

भारत की नीति को बताया ‘रणनीतिक संयम’

किरियाकू ने खुलासा किया कि CIA के भीतर भारत की विदेश नीति को “Strategic Patience (रणनीतिक संयम)” कहा जाता था. उनके अनुसार, भारत ने न केवल 2001 के संसद हमले बल्कि 2008 के मुंबई हमले के बाद भी संयम बरता और युद्ध का रास्ता नहीं चुना.

उन्होंने कहा, "भारत ने बार-बार यह दिखाया कि वह एक जिम्मेदार और परिपक्व देश है. उसने तात्कालिक प्रतिक्रिया देने के बजाय संयम दिखाया. लेकिन अब समय आ गया है जब भारत को यह ध्यान रखना होगा कि उसका संयम कहीं कमजोरी के रूप में न देखा जाए."

अगर युद्ध हुआ तो पाकिस्तान हारेगा- किरियाकू

पूर्व CIA अधिकारी ने भारत और पाकिस्तान की सैन्य ताकत की तुलना करते हुए कहा कि यदि दोनों देशों के बीच पारंपरिक युद्ध (Conventional War) होता है, तो पाकिस्तान की हार तय है.

उन्होंने कहा, "अगर वास्तविक युद्ध हुआ तो पाकिस्तान हार जाएगा. मैं परमाणु युद्ध की बात नहीं कर रहा, सिर्फ पारंपरिक युद्ध में भी उसकी हार निश्चित है."

उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य क्षमता, तकनीकी कौशल और रणनीतिक तैयारी पाकिस्तान की तुलना में बहुत आगे है. पाकिस्तान के लिए भारत को उकसाना एक “राजनीतिक भूल” साबित होगी.

भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का उदाहरण

जॉन किरियाकू ने भारत की हालिया सैन्य कार्रवाइयों का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि वह आतंकवाद या परमाणु धमकियों से डरने वाला देश नहीं है.

उन्होंने कहा, "भारत ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और हाल ही में 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के जरिये यह दिखाया है कि वह आतंकवाद और ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा. भारत अब एक निर्णायक शक्ति बन चुका है."

उनके अनुसार, भारत अब सिर्फ रक्षा की नीति पर नहीं, बल्कि सक्रिय जवाबी रणनीति पर काम कर रहा है, और यही उसे विश्व मंच पर एक जिम्मेदार और मजबूत राष्ट्र बनाता है.

व्हाइट हाउस ने क्यों नहीं की कार्रवाई?

जब उनसे पूछा गया कि इतने स्पष्ट सबूतों के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की, तो जॉन किरियाकू ने जवाब दिया, "यह निर्णय व्हाइट हाउस का था. उस समय अमेरिका के लिए पाकिस्तान के साथ रिश्ते बनाए रखना भारत से ज्यादा जरूरी समझा गया. हमें पाकिस्तान की जरूरत थी, उन्हें हमारी नहीं."

उन्होंने कहा कि उस दौर में पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक “रणनीतिक सहयोगी” था, क्योंकि अफगानिस्तान में चल रहे अमेरिकी अभियानों के लिए पाकिस्तान का भूगोल और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण था.

कौन हैं जॉन किरियाकू?

जॉन किरियाकू ने लगभग 15 वर्षों तक CIA में सेवा दी. वे पहले इंटेलिजेंस एनालिस्ट (विश्लेषक) के रूप में काम करते थे और बाद में 9/11 के बाद पाकिस्तान में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस का नेतृत्व किया.

उन्होंने पेशावर, लाहौर, कराची, फैसलाबाद और क्वेटा जैसे शहरों में अल-कायदा नेटवर्क को ट्रैक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

2007 में उन्होंने अमेरिकी मीडिया में खुलासा किया कि CIA पूछताछ के दौरान टॉर्चर (यातना) का इस्तेमाल कर रही थी. उन्होंने बताया कि एजेंसी “वॉटरबोर्डिंग” जैसी अमानवीय तकनीकों से संदिग्धों से जानकारी लेती थी.

इस खुलासे के बाद उन पर मुकदमा चला और उन्हें 23 महीने की सजा हुई. फिर भी किरियाकू ने कभी पछतावा नहीं जताया. उनका कहना है, "मैंने सच के लिए आवाज उठाई थी. मुझे कोई पछतावा नहीं है. अगर फिर से मौका मिला, तो मैं वही करूंगा."

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