अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन एक बार फिर विवादों में हैं. डोनाल्ड ट्रंप के पिछले राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे बोल्टन पर अब अमेरिकी सरकार ने 18 मामलों में गंभीर आपराधिक आरोप लगाए हैं. इन आरोपों में राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं का गलत इस्तेमाल, दस्तावेजों का अनधिकृत संग्रह, और संवेदनशील जानकारी का संभावित लीक शामिल है.
अगर ये आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं, तो बोल्टन को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.
क्या हैं बोल्टन पर लगे आरोप?
बोल्टन पर दो प्रमुख श्रेणियों में आरोप लगाए गए हैं:
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोल्टन ने ट्रंप प्रशासन के दौरान कई संवेदनशील बैठकों और फैसलों के नोट्स बनाए थे, जिन्हें उन्होंने अपने AOL ईमेल अकाउंट में सेव कर रखा था. वह अपने निजी और पारिवारिक ईमेल पर भी इन दस्तावेजों को भेजा करते थे.
हैकर्स ने किया था बोल्टन का ईमेल हैक
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, 2021 में बोल्टन का ईमेल खाता ईरानी हैकर्स द्वारा हैक किया गया था. हैकर्स ने अमेरिका को धमकी दी थी कि अगर बोल्टन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इन दस्तावेजों को सार्वजनिक कर देंगे. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब यह सामने आया कि बोल्टन के पास संवेदनशील सरकारी सूचनाएं उनके निजी खातों में थीं.
पहली जांच 2021 में शुरू हुई थी
बोल्टन के खिलाफ पहली जांच 2021 में शुरू हुई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में इसे बंद कर दिया गया था. हालांकि, जो बाइडेन प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 2022 में जांच को फिर से शुरू किया. एफबीआई (FBI) की ओर से की गई छानबीन में बोल्टन के घर पर तलाशी ली गई, जहां से कई प्रिंटेड और डिजिटल रूप में संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए.
SCIF की सुविधा हटा ली गई थी
यह बात भी सामने आई है कि जब बोल्टन व्हाइट हाउस में कार्यरत थे, तब उनके घर में एक विशेष SCIF (Sensitive Compartmented Information Facility) मौजूद था, जहां गोपनीय दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से रखा जा सकता था. लेकिन 2019 में बोल्टन के पद से हटने के बाद, यह सुविधा औपचारिक रूप से वापस ले ली गई थी. इसके बाद भी उन्होंने कथित तौर पर संवेदनशील दस्तावेज अपने पास रखे.
ट्रंप से मतभेद और किताब का विवाद
बोल्टन और ट्रंप के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. बोल्टन ने 2019 में इस्तीफा देने के बाद ट्रंप प्रशासन की तीखी आलोचना की थी और बाद में 2020 में एक किताब ‘The Room Where It Happened’ प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंने ट्रंप के कार्यकाल में हुई कई आंतरिक चर्चाओं और फैसलों को उजागर किया था.
ट्रंप ने उस किताब को रिलीज होने से पहले रोकने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत से उन्हें राहत नहीं मिली. ट्रंप अब भी बोल्टन को “झूठा और धोखेबाज” करार देते हैं. उन्होंने हाल ही में कहा, “वो बुरा आदमी है. जैसा करोगे, वैसा भरोगे.”
यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई- बोल्टन
बोल्टन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है. उन्होंने कहा कि यह सब ट्रंप की तरफ से उन्हें निशाना बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है, क्योंकि उन्होंने ट्रंप की नीतियों की आलोचना की थी.
बोल्टन ने कहा, "मैंने 40 वर्षों तक अमेरिका की सुरक्षा नीति के लिए काम किया है. यह पूरा मामला उन लोगों को डराने के लिए है, जो ट्रंप के खिलाफ खड़े हुए थे. यह वही सोच है जो सोवियत यूनियन के तानाशाह स्टालिन की थी, ‘मुझे आदमी दो, मैं उसका अपराध ढूंढ लूंगा.’"
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