वॉशिंगटन डीसी: दुनिया की राजनीति सिर्फ रणनीति और सुरक्षा के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि कहीं गहराई में व्यक्तिगत स्वार्थ, पारिवारिक कारोबार और सत्ता का लालच भी छिपा होता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन ने हाल ही में एक ऐसा ही खुलासा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. उनका दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की बजाय अपने पारिवारिक फायदे के लिए भारत से रिश्ते बिगाड़े और पाकिस्तान के साथ नज़दीकियां बढ़ाईं.
यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि अमेरिका की विदेश नीति में भारत के साथ हुई दूरी और पाकिस्तान से ट्रंप परिवार के कारोबारी रिश्तों का एक गंभीर विश्लेषण है.
ट्रंप का 'फैमिली बिजनेस' और पाकिस्तान की मेहरबानी
जेक सुलिवन के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत और अमेरिका के बीच जो तनाव बढ़ा, उसकी जड़ें केवल कूटनीति में नहीं थीं, बल्कि व्यक्तिगत कारोबारी हितों में थीं. उन्होंने साफ आरोप लगाया कि ट्रंप परिवार की एक कंपनी, वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) ने पाकिस्तान में बड़ा व्यापारिक समझौता किया, जिसके बाद ट्रंप का झुकाव भारत से हटकर पाकिस्तान की ओर हो गया.
14 मार्च 2025 को पाकिस्तान में ‘क्रिप्टो काउंसिल’ की स्थापना हुई और कुछ ही हफ्तों बाद 26 अप्रैल को इस परिषद ने ट्रंप परिवार से जुड़ी WLF के साथ ब्लॉकचेन और क्रिप्टो को लेकर एक बड़ा समझौता किया. इस डील में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से लेकर सेना प्रमुख और वित्त मंत्री तक शामिल थे. इसके बदले में ट्रंप परिवार को न केवल अरबों डॉलर का मुनाफा हुआ, बल्कि पाकिस्तान में एक नए बाजार में उनकी कंपनी को सरकारी मान्यता भी मिली.
यही नहीं, इस सौदे के बाद ट्रंप परिवार के डिजिटल टोकन (WLFI) की वैल्यू भी तेजी से बढ़ गई और इसके पीछे की पूरी लॉबी ट्रंप के करीबी लोगों की ही थी.
भारत के खिलाफ टैरिफ और ट्रंप की बदलती सोच
व्यापारिक समझौते के कुछ ही समय बाद ट्रंप प्रशासन का भारत के प्रति रवैया बदलता दिखा. भारत पर टैरिफ की मार बढ़ा दी गई. पहले जहां भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया था, वहीं इसे बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया. इससे भारत-अमेरिका व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ.
ट्रंप ने इसका कारण बताया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जबकि यही काम चीन भी कर रहा है, लेकिन उस पर कोई विशेष टैरिफ नहीं लगाया गया. सवाल यह उठता है कि अगर नीति समान है, तो सजा भी समान होनी चाहिए थी. लेकिन ट्रंप का झुकाव अब पाकिस्तान की ओर था, जिससे उनके निजी हित जुड़े हुए थे.
जेक सुलिवन ने कहा कि ट्रंप ने निजी लाभ के लिए भारत-पाक तनाव को डिप्लोमैटिक ढंग से हल कराने का दावा भी किया, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर "पीसमेकर" के रूप में पेश करने का अवसर मिल सके.
अमेरिका-भारत संबंधों में आई खटास भारी नुकसान
जेक सुलिवन ने इस इंटरव्यू में गहरी चिंता जताते हुए कहा कि भारत को खोना अमेरिका के लिए एक रणनीतिक भूल होगी. उन्होंने कहा कि भारत केवल व्यापारिक साझेदार नहीं है, बल्कि चीन जैसे रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी से निपटने के लिए एक मजबूत सहयोगी भी है.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां टेक्नोलॉजी, टैलेंट, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में अमेरिका के साथ साझेदारी का विशाल अवसर है. अगर अमेरिका भारत से अपने रिश्ते खराब करता है, तो इसका सीधा फायदा चीन और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों को मिलेगा.
यह भी उल्लेखनीय है कि दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही हर देश अपनी नीतियों को अमेरिका की बजाय अपने हितों के आधार पर तय कर रहा है. ऐसे में अमेरिका के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साझेदार को खो देना, आने वाले वर्षों में एक डिप्लोमैटिक भूल साबित हो सकता है.
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