Bangladeshi Hindus: बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों के नाम पर हिंसा तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है. ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच देश में कम से कम 71 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सीधे तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया.
इन घटनाओं ने न केवल बांग्लादेश के भीतर मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि भारत में भी इसे लेकर गंभीर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटनाएं बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में फैली हुई हैं, जिससे यह साफ होता है कि मामला किसी एक क्षेत्र या कुछ अलग-थलग घटनाओं तक सीमित नहीं है.
किन इलाकों में सबसे ज्यादा घटनाएं?
HRCBM की रिपोर्ट में जिन जिलों का उल्लेख किया गया है, उनमें रंगपुर, चांदपुर, चटगांव, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कुमिल्ला, गाजीपुर, टांगाइल और सिलहट जैसे इलाके शामिल हैं.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या और इतने व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में हुई घटनाएं यह संकेत देती हैं कि यह एक सुनियोजित पैटर्न बन चुका है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करना है.
एक आरोप, पूरी बिरादरी को सजा
रिपोर्ट में यह बात खास तौर पर सामने आई है कि अधिकांश मामलों में ईशनिंदा का आरोप किसी एक व्यक्ति पर लगाया जाता है, लेकिन उसका खामियाजा पूरे हिंदू समुदाय को भुगतना पड़ता है.
उदाहरण के तौर पर, 27 जुलाई 2025 को रंगपुर के बेटगाड़ी इलाके में एक 17 वर्षीय नाबालिग की गिरफ्तारी के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि कम से कम 22 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की गई. यह घटना दिखाती है कि आरोप लगते ही भीड़ किस तरह सामूहिक हिंसा पर उतर आती है.
इसी तरह 19 जून को बरिशाल में एक युवक की गिरफ्तारी के बाद चांदपुर में तनाव फैल गया और स्थानीय हिंदू आबादी को डर के माहौल का सामना करना पड़ा.
सोशल मीडिया बना नया हथियार
HRCBM की रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा के अधिकांश मामलों की शुरुआत फेसबुक पोस्ट से होती है. कई मामलों में यह पाया गया कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट हैक किए गए थे या पोस्ट की सत्यता की पुष्टि नहीं हो सकी थी.
इसके बावजूद, सामाजिक दबाव और भीड़ के आक्रोश के चलते पुलिस ने कई बार बिना विस्तृत जांच के तुरंत गिरफ्तारियां कर लीं. कई मामलों में साइबर सिक्योरिटी एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय अब ऐसे मामलों के नए केंद्र बनते जा रहे हैं, जहां छात्र ईशनिंदा के आरोपों में फंसाए जा रहे हैं. कई छात्रों को निलंबन, निष्कासन और पुलिस रिमांड जैसी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है.
भीड़ हिंसा और मौतों के मामले
रिपोर्ट में ईशनिंदा से जुड़े मामलों में हुई कई मौतों का भी उल्लेख किया गया है. 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में एक 30 वर्षीय हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और बाद में उसका शव जला दिया गया.
खुलना में एक नाबालिग की मौत का मामला भी सामने आया, जहां कथित तौर पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हमला हुआ. इन घटनाओं ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
HRCBM की रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा के इन मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक आरोपी हिंदू समुदाय से हैं, जिनमें बड़ी संख्या 15 से 17 वर्ष के नाबालिगों की है.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से हाशिये पर हैं. ऐसे वर्गों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना और खुद को निर्दोष साबित करना और भी मुश्किल हो जाता है.
भारत की चिंता और प्रतिक्रिया
HRCBM की रिपोर्ट भारत सरकार की हालिया चिंताओं से मेल खाती है. भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हत्या और लिंचिंग की घटनाओं की निंदा की है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
भारत ने यह भी दोहराया है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी जिम्मेदारी होती है.
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