बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बना रहे कट्टरपंथी, इस्कॉन मंदिर पर प्रतिबंध लगाने की कर रहे मांग

बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी समूहों ने देश के आगामी संसदीय चुनावों (फरवरी 2026) से पहले भारत विरोधी रैलियों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है.

Fundamentalists targeting Hindus in Bangladesh
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बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी समूहों ने देश के आगामी संसदीय चुनावों (फरवरी 2026) से पहले भारत विरोधी रैलियों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है. विशेष रूप से, इस्कॉन (ISKCON) पर प्रतिबंध लगाने और इसे कथित रूप से भारतीय एजेंट घोषित करने की मांग की जा रही है.

जमात-ए-इस्लामी, हिज्बुत-तहरीर और हिफाजत-ए-इस्लाम से जुड़े छात्र संगठनों ने शुक्रवार को देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किए. इन रैलियों का मुख्य उद्देश्य भारत विरोधी संदेश फैलाना और इस्कॉन जैसे हिंदू धार्मिक संस्थानों पर आरोप लगाना था. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अवामी लीग पर प्रतिबंध और कुछ वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बाद देश में चुनावी गतिविधियों में तेजी आई है.

इस्कॉन को कट्टरपंथी हिंदुत्व संगठन बताना

चटगांव में हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश ने शुक्रवार की नमाज के बाद विरोध रैली आयोजित की. इस रैली में इस्कॉन को "कट्टरपंथी हिंदुत्व संगठन" बताया गया. रैली में मौलाना अली उस्मान, जो हिफाजत के केंद्रीय नायब-ए-अमीर हैं, ने कहा कि इस्कॉन धार्मिक और सांप्रदायिक अशांति फैलाने का काम कर रहा है. उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और इसे प्रतिबंधित करने की मांग की.

हिफाजत के नेताओं का दावा है कि जिस तरह से अवामी लीग के खिलाफ कार्रवाई की गई है और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर मुकदमे चलाए गए हैं, उसी प्रकार इस्कॉन को भी कानून के दायरे में लाना चाहिए. उनका यह तर्क है कि इससे बांग्लादेश में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने में मदद मिलेगी.

हिंदू समुदाय में बढ़ती चिंता

इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के भीतर चिंता बढ़ गई है. समुदाय के नेताओं का कहना है कि ऐसे कदम उनके अधिकारों और धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. इससे हिंदू अल्पसंख्यक और अधिक हाशिए पर जा सकते हैं और उनके खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों पर राजनीतिक या साम्प्रदायिक प्रतिबंध किसी भी बहुल धार्मिक समाज के लिए संवेदनशील मुद्दा होता है. बांग्लादेश में ऐसे कदमों से धार्मिक तनाव बढ़ सकता है और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता हो सकती है.

भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर प्रभाव

अभी तक इस मामले में भारत सरकार की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि, दोनों देशों के बीच लंबे समय से धार्मिक और सांप्रदायिक मामलों को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को लेकर भारत समय-समय पर चिंता व्यक्त करता रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा और धार्मिक तनाव बढ़ने की संभावना रहती है. ऐसे में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग से न केवल हिंदू समुदाय, बल्कि बांग्लादेश में सामान्य नागरिक और धार्मिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है.

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