Gandhi Jayanti 2025: कौन था वो शख्स, जिसने 18 साल पहले ही कर दी थी गांधी जी की हत्या की भविष्यवाणी?

Gandhi Jayanti 2025: हर साल 2 अक्टूबर को पूरे देश में महात्मा गांधी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है. यह दिन न केवल उनके जन्मदिन के रूप में याद किया जाता है, बल्कि उनकी अहिंसा, सत्य और स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान को भी सम्मानित किया जाता है.

Gandhi Jayanti 2025 Who predicted Gandhi Ji assassination 18 years before
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Gandhi Jayanti 2025: हर साल 2 अक्टूबर को पूरे देश में महात्मा गांधी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है. यह दिन न केवल उनके जन्मदिन के रूप में याद किया जाता है, बल्कि उनकी अहिंसा, सत्य और स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान को भी सम्मानित किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांधीजी की हत्या की एक रहस्यमयी भविष्यवाणी भी की गई थी? आइए, जानते हैं उस शख्स के बारे में जिसने वर्षों पहले ही यह सच्चाई देख ली थी.

कौन था वह ज्योतिषी?

30 जनवरी 1948 की वो दिन था जब पूरी दुनिया सदमे में थी. नई दिल्ली के बिरला हाउस में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी पर गोली चलाई, जिसके बाद गांधीजी ने अंतिम सांस ली. लेकिन यह घटना अचानक नहीं हुई थी. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और स्वतंत्रता सेनानी पंडित सूर्य नारायण व्यास ने कई साल पहले ही यह कहा था कि गांधीजी की हत्या हो सकती है.

पंडित सूर्य नारायण व्यास का महत्व

पंडित सूर्य नारायण व्यास सिर्फ एक ज्योतिषी नहीं थे, बल्कि वे एक गहरी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत विद्वान थे. कहा जाता है कि उन्होंने भारत की आजादी की तारीख 15 अगस्त 1947 की सही-सही भविष्यवाणी की थी. इतना ही नहीं, आजाद भारत की कुंडली बनवाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है. उनके ज्योतिष ज्ञान और राष्ट्रप्रेम ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में खास मुकाम दिलाया.

पंडित व्यास ने क्या कहा था?

उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि गांधीजी का जीवन लंबा नहीं होगा और उनकी मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि हिंसक घटना होगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि गांधीजी की हत्या की वजह उनके विचार और आदर्श होंगे, जो कुछ कट्टरपंथी समूहों को मंजूर नहीं होंगे. पंडित व्यास का मानना था कि गांधीजी के अहिंसात्मक मार्ग और सत्य के सिद्धांतों से विरोधी असहज होंगे, जो अंततः उनकी जान को खतरे में डालेंगे.

भविष्यवाणी कब और कैसे हुई?

यह भविष्यवाणी 1930 के दशक में हुई थी, जब महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के शीर्ष पर थे. उस समय देश में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल चल रही थी. गांधीजी के अनुयायी तो उनके मार्गदर्शन में थे, लेकिन कुछ कट्टरपंथी और असहमति रखने वाले गुट उनके खिलाफ थे. यही असहमति धीरे-धीरे नाथूराम गोडसे जैसे व्यक्तियों के मन में घृणा और हिंसा की भावना जगाने लगी, जो अंततः 1948 में गांधीजी की हत्या की वजह बनी.

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