Lakhvinder Kumar Deported: भारत के कानून प्रवर्तन तंत्र के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ. सीबीआई (CBI) ने अमेरिका से फरार चल रहे मोस्ट वांटेड गैंगस्टर लखविंदर कुमार को सफलतापूर्वक भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की. यह कार्रवाई न सिर्फ एक अपराधी की गिरफ्तारी भर है, बल्कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पुलिसिंग क्षमता और कूटनीतिक प्रभाव की बड़ी मिसाल भी है.
सीबीआई ने इस पूरे ऑपरेशन को विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर अंजाम दिया. लखविंदर कुमार का नाम हरियाणा पुलिस की वांटेड लिस्ट में लंबे समय से था. उसके खिलाफ जबरन वसूली, धमकी, अवैध हथियार रखने और हत्या की कोशिश जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं.
The Central Bureau of Investigation (CBI), in collaboration with MEA and MHA, has successfully coordinated the return of wanted fugitive Lakhvinder Kumar on 25.10.2025 from the United States of America.
— ANI (@ANI) October 25, 2025
Lakhvinder Kumar is wanted by Haryana Police in multiple criminal cases… pic.twitter.com/kckV9RF6b1
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लखविंदर कुमार कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गैंग से जुड़ा था. यही गैंग बॉलीवुड स्टार सलमान खान, पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला और हरियाणा-पंजाब क्षेत्र के कई व्यापारियों को धमकाने के मामलों में कुख्यात रहा है.
रेड नोटिस से लेकर डिपोर्टेशन तक की पूरी कहानी
इस ऑपरेशन की शुरुआत 26 अक्टूबर 2024 को हुई थी, जब हरियाणा पुलिस के अनुरोध पर सीबीआई के इंटरपोल विंग (NCB-Interpol India) ने लखविंदर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया. रेड नोटिस एक तरह का अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट होता है, जो इंटरपोल की ओर से 190 से अधिक देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजा जाता है.
अमेरिकी एजेंसियों ने इस नोटिस के आधार पर लखविंदर की लोकेशन ट्रेस की और उसके खिलाफ कानूनी डिपोर्टेशन प्रोसेस शुरू की. करीब एक साल तक चली कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद, अंततः 25 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी अधिकारियों ने लखविंदर कुमार को भारत को सौंप दिया. जैसे ही उसका विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, हरियाणा पुलिस की एक विशेष टीम ने उसे मौके पर ही हिरासत में ले लिया.
BHARATPOL की भूमिका, भारत की इंटरनेशनल पुलिसिंग का चेहरा
भारत में इंटरपोल से जुड़े सभी ऑपरेशनों का समन्वय नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB-Interpol India) यानी BHARATPOL करता है. यह यूनिट दुनिया के विभिन्न देशों की पुलिस एजेंसियों से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय अपराधियों की लोकेशन, गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है.
CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल चैनलों के जरिए भारत ने 130 से ज्यादा वांटेड अपराधियों को अलग-अलग देशों से वापस लाया है. लखविंदर कुमार की वापसी इस दिशा में एक और मील का पत्थर है.”
लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क पर तगड़ा वार
लखविंदर कुमार सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि बिश्नोई नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ कहा जाता था. हरियाणा और पंजाब में चल रहे कई एक्सटॉर्शन (जबरन वसूली) नेटवर्क को वह विदेश से संचालित करता था. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका में रहते हुए भी लखविंदर ने भारत में कई कारोबारी और प्रॉपर्टी डीलरों को धमकियां दी थीं और हवाला के जरिए पैसे मंगवाए थे.
CBI के एक अधिकारी के मुताबिक, “लखविंदर की गिरफ्तारी बिश्नोई गैंग के लिए वैसा ही झटका है जैसा गोल्डी बराड़ के खिलाफ इंटरपोल एक्शन के वक्त लगा था.”
भारत की वैश्विक साख का प्रतीक
लखविंदर कुमार का भारत लौटना इस बात का संकेत है कि अब भारत वैश्विक कानून प्रवर्तन सहयोग का एक मजबूत केंद्र बन चुका है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका, कनाडा, यूके, और खाड़ी देशों के साथ मिलकर कई ऐसे अपराधियों को वापस लाने में सफलता पाई है, जो पहले “अंतरराष्ट्रीय शरण” लेकर कानूनी पकड़ से बचते रहे थे. यह मामला यह भी दर्शाता है कि भारत अब अपने अपराधियों को ‘सुरक्षित ठिकाना’ नहीं बनने देगा, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हों.
आगे की कानूनी प्रक्रिया
लखविंदर कुमार को फिलहाल हरियाणा पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपा गया है. उससे पूछताछ में बिश्नोई गैंग की नई फंडिंग चेन, हथियार आपूर्ति रूट्स और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसकी गिरफ्तारी के बाद कई अवैध फंडिंग चैनल्स और हवाला नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.
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