गौतम गंभीर और हर्षित राणा विवाद, जब ‘फेवरेटिज्म’ के शोर के बीच सामने आई सच्चाई

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा इन दिनों सोशल मीडिया की सुर्खियों में हैं. क्रिकेट फैंस का एक तबका गंभीर पर फेवरेटिज्म यानी पक्षपात का आरोप लगा रहा है. उनका मानना है कि कोच का कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से पुराना जुड़ाव हर्षित के चयन पर असर डाल रहा है.

Gautam Gambhir and Harshit Rana on favoritism know whats truth
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भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा इन दिनों सोशल मीडिया की सुर्खियों में हैं. क्रिकेट फैंस का एक तबका गंभीर पर फेवरेटिज्म यानी पक्षपात का आरोप लगा रहा है. उनका मानना है कि कोच का कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से पुराना जुड़ाव हर्षित के चयन पर असर डाल रहा है. हालांकि, इस पूरे विवाद पर अब KKR के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज मनविंदर बिस्ला ने सामने आकर आलोचकों को करारा जवाब दिया है.

मनविंदर बिस्ला ने ‘इंडियन क्रिकेट कैंटीन’ यूट्यूब चैनल पर बातचीत में साफ कहा कि गंभीर पर लग रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा, कि जो लोग ये कह रहे हैं कि हर्षित राणा को गौतम गंभीर ने फेवर किया है, वो शायद असली KKR फैंस नहीं हैं. लोगों को लगता है कि दोनों का KKR से जुड़ाव है, इसलिए गंभीर उसे आगे बढ़ा रहे हैं. लेकिन भाई, कोई मामा-चाचा का रिश्ता नहीं है यहां. ये सिर्फ सोशल मीडिया का बनाया हुआ नैरेटिव है.” बिस्ला का कहना था कि गंभीर जैसे खिलाड़ी और कोच के लिए “मेरिट” ही सबसे बड़ा पैमाना है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर्षित राणा को टीम इंडिया में जगह उनकी मेहनत और काबिलियत के दम पर मिली है, न कि किसी जान-पहचान से.

हर्षित राणा की गेंदों में आग, बल्ले में दम

पक्षपात के आरोपों के बीच यह भी सच है कि हर्षित राणा का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्होंने सबसे ज्यादा विकेट चटकाए. वहीं, टी20 सीरीज के दूसरे मैच में उन्होंने बल्ले से भी अहम योगदान दिया — 33 गेंदों पर 35 रन बनाकर टीम को संकट से बाहर निकाला. तीसरे वनडे में उन्होंने शुरुआती स्पेल में 4 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की रीढ़ तोड़ दी. हालांकि मैच के बाद सुर्खियों में कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली छा गए, लेकिन बिस्ला ने कहा कि लोगों ने रोहित-विराट की बात की, लेकिन क्या किसी ने हर्षित के बारे में सोचा? अगर उसने शुरुआत में विकेट नहीं लिए होते, तो क्या मैच का नतीजा वही होता?” 

“काबिलियत को नजरअंदाज करना नाइंसाफी है”

बिस्ला ने कहा कि क्रिकेट में आज भी कई बार ऐसे खिलाड़ी चर्चा में नहीं आते जो असल में मैच का रुख मोड़ देते हैं. हर्षित भी उन्हीं में से एक हैं — एक ऐसा युवा गेंदबाज जो लगातार मेहनत कर रहा है और टीम के लिए निर्णायक योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों को मौका और पहचान दोनों की जरूरत होती है. अगर हर प्रदर्शन को किसी ‘KKR कनेक्शन’ से जोड़ दिया जाएगा, तो इससे युवा खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा.

गंभीर सिर्फ कोच नहीं, विजेता मानसिकता के प्रतीक हैं

गौतम गंभीर हमेशा से अपने निर्णय और दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं. चाहे बतौर खिलाड़ी हों या कोच, उन्होंने कभी लोकप्रियता की राजनीति नहीं की, बल्कि प्रदर्शन को प्राथमिकता दी है. बिस्ला ने कहा कि गंभीर ने हर्षित को चुनकर सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली भविष्य पर भरोसा जताया है. उन्होंने आलोचकों से अपील की कृपया हर फैसले को फेवरेटिज्म की नजर से मत देखिए. क्रिकेट मैदान पर केवल काबिलियत बोलती है, रिश्ते नहीं.”

विवाद की बजाय उपलब्धियों पर हो चर्चा

हर्षित राणा की निरंतर बढ़ती परफॉर्मेंस और गंभीर की कोचिंग के तहत टीम इंडिया की नई ऊर्जा इस समय चर्चा का असली विषय होनी चाहिए. सोशल मीडिया के शोर के बीच यह याद रखना जरूरी है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य मेहनती युवाओं के कंधों पर टिका है, न कि बेबुनियाद विवादों पर.

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