मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. गाजा में लगातार बिगड़ती मानवीय स्थिति और शांति प्रयासों के बीच पाकिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत अपनी सेना भेजने के लिए तैयार है.
हालांकि, इस्लामाबाद ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सैन्य भूमिका केवल पीसकीपिंग तक सीमित रहेगी और वह हमास को निरस्त्र करने जैसी किसी भी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा.इस घोषणा के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पाकिस्तान किस शर्त पर गाजा में हस्तक्षेप कर सकता है और इस फैसले के पीछे कूटनीतिक गणित क्या है.
हम सैनिक भेजेंगे, लेकिन हमास को निरस्त्र नहीं करेंगे
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्पष्ट आदेश के तहत गाजा में सैनिक तैनात करने को तैयार है.उन्होंने कहा हमारी भूमिका शांति स्थापना की होगी, शांति लागू करने की नहीं. हमास को निरस्त्र करना फिलिस्तीनी सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है, पाकिस्तान की नहीं.डार ने यह भी बताया कि इस निर्णय पर प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व से सलाह-मशविरा किया है.
अमेरिकी मध्यस्थता और नया ISF, कहां फिट बैठता है पाकिस्तान?
गाजा युद्धविराम और स्थिरता के लिए अमेरिका जिस इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) का मसौदा तैयार कर रहा है, उसमें मुस्लिम बहुल देशों के सैनिकों की तैनाती का प्रस्ताव है.इसी संदर्भ में पाकिस्तान की संभावित भागीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई थी.डार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान केवल तभी सेना भेजेगा जब ISF का जनादेश पारदर्शी, सीमित और साफ-सुथरा हो.उन्होंने यह भी याद दिलाया कि रियाद में हुई बातचीत के दौरान हमास को निरस्त्र करने का मुद्दा उठा था, जिस पर पाकिस्तान ने पहले ही विरोध जताया था.
हम पीसकीपर हैं, एन्फोर्सर नहीं
डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान न तो हमास के खिलाफ किसी सैन्य अभियान में शामिल होगा और न ही ऐसी कोई भूमिका स्वीकार करेगा जिससे वह फिलिस्तीनी प्रतिरोध के सामने खड़ा दिखे.उनके अनुसार हमारा उद्देश्य सिर्फ शांति को बनाए रखना है. हम गाजा में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी सशस्त्र दमनात्मक ऑपरेशन का हिस्सा नहीं बनेंगे.
UNSC के प्रस्ताव के बाद बढ़ी हलचल
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाल ही में अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था, जिसमें ISF को अधिकृत किया गया है कि वह गाजा में हथियारों और सैन्य ढांचे को निष्क्रिय करने में सहायता करे.13 देशों (जिसमें पाकिस्तान भी शामिल था) ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि रूस और चीन मतदान से दूर रहे.हालांकि, हमास ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय बल को हथियार छीनने का जनादेश देना अस्वीकार्य है.
पाकिस्तान में भी उठा विवाद, सेना की भूमिका पर मतभेद
पिछले महीने यह अफवाह फैली थी कि पाकिस्तान को हमास को निरस्त्र करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है. इससे देश में बड़ा राजनीतिक विरोध पैदा हुआ.रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ऐसे किसी भी दावे को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए कड़ी आलोचना की थी.इंडोनेशिया पहले ही इस मिशन के लिए 20,000 सैनिकों की पेशकश कर चुका है, जबकि पाकिस्तान अब भी अपने निर्णय को जनादेश की स्पष्टता से जोड़कर देख रहा है.
फिलिस्तीन पर परंपरागत रुख बरकरार रखना चाहता है पाकिस्तान
इस्लामाबाद लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दे पर समर्थन जताता आया है और हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने से इनकार करता है. डार का ताज़ा बयान इसी नीति की निरंतरता है. पाकिस्तान किसी भी ऐसी भूमिका में नहीं दिखना चाहता जिससे वह फिलिस्तीनी प्रतिरोध का विरोधी प्रतीत हो.