जनरल अनिल चौहान को सेवा विस्तार, CDS पद पर 2026 तक रहेंगे कायम

CDS Anil Chauhan: देश की रक्षा नीति और सैन्य संरचना में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल को बढ़ा दिया है. यह विस्तार उन्हें 30 मई 2026 तक या अगले आदेश तक सीडीएस पद पर बनाए रखेगा.

General Anil Chauhan gets extension in service will remain in the post of CDS till 2026
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CDS Anil Chauhan: देश की रक्षा नीति और सैन्य संरचना में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल को बढ़ा दिया है. यह विस्तार उन्हें 30 मई 2026 तक या अगले आदेश तक सीडीएस पद पर बनाए रखेगा. जनरल चौहान, जो वर्तमान में भारत के रक्षा क्षेत्र में शीर्ष समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं, अब 65 वर्ष की अधिकतम सेवा आयु तक पद पर बने रहेंगे.

यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब भारत संयुक्त सैन्य कमान प्रणाली (Joint Command Structure) को साकार करने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है. ऐसे में जनरल चौहान जैसे अनुभवी सैन्य अधिकारी का नेतृत्व स्थिरता, रणनीतिक निरंतरता और उच्च स्तर की विशेषज्ञता सुनिश्चित करेगा.

अनुभव और सेवा का लंबा सफर

1981 में कमीशन प्राप्त जनरल अनिल चौहान का सैन्य करियर विशिष्ट उपलब्धियों और रणनीतिक अभियानों से भरा रहा है. वह भारतीय सेना के पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी (General Officer Commanding-in-Chief) रह चुके हैं, जहां उनके कार्यकाल में पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद में काफी कमी आई. इससे कई संवेदनशील क्षेत्रों में सेना की तैनाती को भी कम किया जा सका.

उन्होंने अपने करियर में सेना मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, सहित परम विशिष्ट सेवा मेडल जैसे उच्च सैन्य सम्मान प्राप्त किए हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका

सीडीएस के रूप में नियुक्त होने से पहले जनरल चौहान डीजीएमओ (Director General of Military Operations) की भूमिका में भी थे. उनके नेतृत्व में 'ऑपरेशन सनराइज़' जैसे साझा अभियानों को अंजाम दिया गया, जहां भारत और म्यांमार की सेनाओं ने सीमा पर उग्रवादियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की.

बालाकोट स्ट्राइक की रणनीति से लेकर चीन सीमा पर पूर्वी कमान की सतर्कता तक, उन्होंने हर स्तर पर रणनीतिक सूझबूझ और निर्णायक नेतृत्व का परिचय दिया.

अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी समृद्ध

जनरल चौहान का अनुभव केवल सीमित भूभाग तक नहीं रहा. वे अंगोला में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का भी हिस्सा रह चुके हैं, जहां उन्होंने सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा दी. इससे उनकी वैश्विक रणनीतिक समझ और बहुपक्षीय सैन्य समन्वय में पकड़ और मजबूत हुई.

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