बर्लिन: जर्मनी सरकार ने 17 से 45 साल के पुरुषों के लिए विदेश यात्रा को लेकर नया नियम लागू किया है, जिससे एक बार फिर देश के सैन्य और सुरक्षा हालात पर सवाल उठने लगे हैं. अब से, यदि कोई पुरुष तीन महीने से ज्यादा समय के लिए विदेश जाना चाहता है, तो उसे बुंडेसवेहर से अनुमति लेनी होगी. यह कदम जर्मनी की बढ़ती सैन्य ताकत और सुरक्षा जरूरतों से जुड़ा हुआ है.
नई व्यवस्था: अनुमति के बिना नहीं होगी लंबी विदेश यात्रा
नई व्यवस्था के तहत, जर्मनी में 17 से 45 साल के पुरुषों को अब तीन महीने से अधिक समय के लिए विदेश जाने से पहले बुंडेसवेहर यानी जर्मन सेना से अनुमति प्राप्त करनी होगी. यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से लागू होगा और इसका उद्देश्य सैन्य तैयारियों को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना है. पहले यह नियम केवल आपातकाल या युद्ध की स्थिति में लागू होता था, लेकिन अब इसे सामान्य समय में भी लागू किया जा रहा है.
क्या हर पुरुष को विदेश जाने के लिए अनुमति लेनी होगी?
नई नीति के अनुसार, अब इस आयु वर्ग के हर पुरुष को लंबे समय के लिए विदेश जाने से पहले सैन्य प्राधिकरण से अनुमति लेनी अनिवार्य होगी. यह अनुमति बुंडेसवेहर के करियर सेंटर से प्राप्त की जा सकेगी. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी समय सेना के लिए योग्य और उपलब्ध लोग तैयार रहें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी सेवाएं ली जा सकें.
सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के लिए कदम
जर्मनी सरकार ने इस कदम को सीधे तौर पर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के साथ जोड़ा है. जर्मनी का लक्ष्य है कि वह अपनी सेना की संख्या को बढ़ाकर 2035 तक 2.55 से 2.70 लाख तक ले जाए. फिलहाल जर्मनी की सेना में करीब 1.84 लाख सैनिक हैं. ऐसे में, सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह संभावित सैनिकों का डेटा और रिकॉर्ड अपने पास रखे, ताकि भविष्य में सैन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके.
युवाओं को सेना से जोड़ने का प्रयास
नई नीति के तहत, 2008 और उसके बाद जन्मे सभी युवाओं को सेना से जुड़ी रुचि का एक फॉर्म भरना होगा. यह फॉर्म पुरुषों के लिए अनिवार्य होगा, जबकि महिलाएं स्वेच्छा से इसमें शामिल हो सकती हैं. सरकार का उद्देश्य है कि वह युवाओं को भविष्य के सैन्य जरूरतों के लिए तैयार रखे, ताकि वे समय आने पर सेना में शामिल होने के लिए तैयार हों.
क्या यह निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया गया है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर जर्मनी अपनी सुरक्षा नीति को मजबूत करने के प्रयासों में जुटा हुआ है. जर्मनी नाटो का सदस्य देश है और उसकी भूमिका यूरोप की सुरक्षा में महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दृष्टिकोण से देखा जाए, तो जर्मनी को अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हो रही है.
नागरिक स्वतंत्रता पर सवाल?
इस नए नियम को लेकर कुछ आलोचनाएं भी सामने आ रही हैं. आलोचकों का कहना है कि इस फैसले से नागरिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है, क्योंकि पहले ऐसा नियम केवल युद्ध या आपातकालीन स्थिति में लागू होता था, लेकिन अब इसे सामान्य परिस्थितियों में भी लागू किया गया है. यह बदलाव जर्मनी की नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है, जो नागरिकों के अधिकारों पर असर डाल सकता है.
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