आज जब दुनिया युद्ध, तनाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत को वैश्विक स्थिरता और शांति का आधार बनने की उम्मीद के साथ देखा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि भारत की भूमिका रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों को समाप्त करने में निर्णायक साबित हो सकती है.
उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि भारत इस स्थिति में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. मेलोनी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक साख लगातार मजबूत हो रही है और यूरोप सहित कई देश नई दिल्ली की मध्यस्थता की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तीखी टिप्पणी
मेलोनी की सकारात्मक टिप्पणी से ठीक पहले, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन पर रूस को अप्रत्यक्ष आर्थिक समर्थन देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों द्वारा रूस से तेल की खरीद जारी रखने से युद्ध को आर्थिक मदद मिल रही है. ट्रंप ने कहा, जब आप रूस से तेल खरीदते हैं, तो आप इस युद्ध को फंड कर रहे होते हैं. और चीन व भारत ऐसा कर रहे हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि यूरोप के कुछ देश भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, जबकि वे अमेरिका से चीन पर दबाव डालने की अपेक्षा रखते हैं.
यूरोप के राष्ट्राध्यक्षों का भारत पर विश्वास
हालिया हफ्तों में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली जैसे कई यूरोपीय देशों के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया है. सभी ने एक समान स्वर में यह स्वीकार किया है कि अगर भारत पहल करे, तो यूक्रेन संकट के समाधान की राह बन सकती है. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपनी बातचीत में कहा कि पीएम मोदी यूक्रेन संकट को सुलझाने में सहयोग कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने भारत का आभार भी व्यक्त किया.
भारत पर भरोसे की वजह क्या है?
भारत की ताकत उसकी निष्पक्ष, संतुलित और शांतिप्रिय विदेश नीति है. भारत न किसी का विरोध करता है और न किसी का अंध समर्थन. चाहे रूस हो या यूक्रेन भारत दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखता है. प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह एक ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संवाद में रहते हैं, तो दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी चर्चा करने में संकोच नहीं करते. भारत का यह संतुलित रुख यह दर्शाता है कि उसका उद्देश्य किसी भी संघर्ष से राजनीतिक या आर्थिक लाभ उठाना नहीं है, बल्कि वह शांति और स्थिरता का पक्षधर है. यही कारण है कि भारत को आज एक भरोसेमंद, जिम्मेदार और स्थायी वैश्विक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: 'जर्मनी के बिना...', तैयार करेंगे धाकड़ फाइटर जेट, 100 बिलियन यूरो के प्रोजेक्ट पर राफेल वाली Dassault का चैलेंज