सिगरेट के बाद पान मसाला पर सख्ती की तैयारी, बढ़ सकते हैं गुटखा के दाम, क्या बदलाव करने वाली है सरकार?

सिगरेट के बाद अब सरकार की नजर पान मसाला इंडस्ट्री पर है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग को लेकर बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है.

Government preparing to change the packaging of Pan Masala and Gutkha
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नई दिल्ली: सिगरेट के बाद अब सरकार की नजर पान मसाला इंडस्ट्री पर है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग को लेकर बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. अगर ये नियम लागू होते हैं, तो बाजार में मिलने वाले उत्पाद जैसे रजनीगंधा, कमला पसंद, शिखर और विमल की पैकेजिंग पूरी तरह बदल सकती है और इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा.

प्लास्टिक पैकेजिंग हटाने की तैयारी

एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत पान मसाला उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक पैकेजिंग को हटाकर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की बात कही गई है.

नए प्रस्ताव के मुताबिक, प्लास्टिक की जगह कागज, पेपरबोर्ड, सेल्युलोज और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से बनी सामग्री का उपयोग किया जा सकता है. इसका उद्देश्य सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा देना है.

कंपनियों से मांगे गए सुझाव

एफएसएसएआई ने मसौदा अधिसूचना जारी कर उद्योग से सुझाव मांगे हैं. इसमें पान मसाले की पैकेजिंग के लिए संभावित वैकल्पिक सामग्री की सूची को और विस्तारित करने की बात कही गई है.

नियामक का मानना है कि ये सामग्री न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि खाद्य पैकेजिंग के लिए भी उपयुक्त मानी जाती हैं और बदलती इंडस्ट्री जरूरतों के अनुरूप हैं.

पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त पैकेजिंग का लक्ष्य

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म किया जा सकता है.

खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे में साफ कहा गया है कि किसी भी प्रकार के प्लास्टिक पाउच में इन उत्पादों को पैक, स्टोर या बेचा नहीं जाएगा.

इसके लिए 30 दिनों के भीतर उद्योग से प्रतिक्रिया मांगी गई है. यह प्रस्ताव प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुरूप है, जिसमें प्लास्टिक उपयोग को कम करने पर जोर दिया गया है.

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

इस कदम का मुख्य उद्देश्य बढ़ते प्लास्टिक कचरे को कम करना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकना है. पान मसाला छोटे-छोटे पाउच में बड़े पैमाने पर बिकता है, जिससे प्लास्टिक कचरा तेजी से बढ़ता है.

इसके अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और साफ-सफाई से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है.

महंगे हो सकते हैं उत्पाद

अगर ये नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को नई पैकेजिंग तकनीक और सामग्री पर निवेश करना होगा. इससे उनकी लागत बढ़ेगी, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ सकता है.

विशेष रूप से छोटी कंपनियों के लिए यह बदलाव लागू करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा. ऐसे में संभावना है कि बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला जाए और पान मसाला उत्पाद महंगे हो जाएं.

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