अब धड़ाधड़ होगी फाइटर जेट्स की सप्लाई, बढ़ाई जाएगी HAL की कार्यक्षमता, क्या है सरकार का प्लान?

भारत सरकार अब अपनी प्रमुख रक्षा क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है.

Government preparing to increase the efficiency of HAL
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत सरकार अब अपनी प्रमुख रक्षा क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. इस बदलाव का मकसद है कंपनी की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और भारतीय सशस्त्र बलों को तय समय पर विमान और अन्य उपकरणों की डिलीवरी सुनिश्चित करना.

HAL की वर्तमान कार्यप्रणाली, उत्पादन प्रक्रियाएं, और ढांचे को और बेहतर बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है. सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस काम के लिए एक बाहरी परामर्शदाता (कंसल्टिंग ग्रुप) को नियुक्त किया है, जो कंपनी की मौजूदा स्थितियों की गहन समीक्षा कर रहा है और HAL के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत कर रहा है.

ऑर्डर बुक का दबाव और पुनर्गठन की आवश्यकता

फिलहाल HAL के पास करीब ₹2.7 लाख करोड़ से भी ज्यादा का ऑर्डर बैकलॉग है. इसमें फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर्स, अटैक चॉपर, और एयरो इंजन की बड़ी संख्या शामिल है. इसके अलावा यह भी अनुमान है कि आने वाले महीनों में HAL को और भी बड़े ऑर्डर मिलने वाले हैं.

हालांकि यह ऑर्डर बुक कंपनी के लिए एक उपलब्धि की तरह दिख सकती है, लेकिन दूसरी ओर यह एक बड़ी चुनौती भी बन गई है. HAL की मौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता इतनी नहीं है कि वह समय पर इन सभी ऑर्डर्स को पूरा कर सके. यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारतीय वायुसेना लगातार लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) की डिलीवरी में हो रही देरी को लेकर नाखुश है. वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है, और समय पर सप्लाई न मिल पाने से हालात और बिगड़ सकते हैं.

तीन अलग-अलग इकाइयों में विभाजन का विचार

पिछले कुछ वर्षों में HAL के पुनर्गठन की चर्चा समय-समय पर होती रही है. एक पूर्व प्रस्ताव के तहत कंपनी को तीन अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करने का सुझाव दिया गया था:

  • फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट – यह इकाई लड़ाकू विमानों और अन्य विंग एयरक्राफ्ट के निर्माण पर केंद्रित होगी.
  • हेलिकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट – यह भाग विभिन्न श्रेणियों के हेलिकॉप्टरों के उत्पादन का जिम्मा संभालेगा.
  • मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) यूनिट – यह खंड सेवा में मौजूद विमानों की मरम्मत और मेंटेनेंस पर केंद्रित रहेगा.

उस समय यह योजना इसलिए अमल में नहीं लाई जा सकी थी क्योंकि HAL के पास उस वक्त इतनी बड़ी ऑर्डर बुक नहीं थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और पुनर्गठन की आवश्यकता कहीं ज्यादा स्पष्ट और जरूरी हो गई है.

सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार इस पुनर्गठन के जरिए HAL की उत्पादन क्षमता और संचालन दक्षता में सुधार लाना चाहती है. इसका प्राथमिक उद्देश्य यह है कि HAL आने वाले वर्षों में नई पीढ़ी के लड़ाकू विमान, जैसे कि AMCA (Advanced Multirole Combat Aircraft) जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में प्रभावी भागीदारी कर सके.

AMCA भारत का अगली पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित किया जा रहा है. लेकिन जब तक HAL अपने मौजूदा ऑर्डर पर समय से काम नहीं कर पाता, तब तक नए प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक हैंडल करना मुश्किल हो सकता है.

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