ढाका: बांग्लादेश में गुरुवार रात से लगातार हिंसा भड़क उठी है. यह हिंसा उस समय शुरू हुई जब युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर सामने आई. हादी को चुनावी अभियान के दौरान गोली लगी थी और उन्हें गंभीर स्थिति में सिंगापुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. छह दिन के इलाज के बाद उनकी मौत हो गई.
हादी की हत्या के बाद राजधानी ढाका सहित कई शहरों में प्रदर्शन और उपद्रव शुरू हो गए. प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख मीडिया संस्थानों और राजनीतिक कार्यालयों पर हमला किया. इस हिंसा ने देश में मीडिया की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं.
उस्मान हादी और ग्रेटर बांग्लादेश विवाद
हादी की हत्या को लेकर यह विवाद भी सामने आया कि उन्होंने 2024 में शेख हसीना सरकार के विरोध में चुनावी अभियान के दौरान ग्रेटर बांग्लादेश के कथित नक्शे साझा किए थे. इस नक्शे में बांग्लादेश के साथ भारत के कई हिस्से, जैसे बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, और म्यांमार का अराकान (रखाइन) राज्य, ग्रेटर बांग्लादेश के हिस्से के रूप में दिखाए गए थे.
हालांकि, बांग्लादेशी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस विचार का समर्थन नहीं किया है और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हादी की हत्या का इस नक्शे या किसी विदेश नीति विवाद से कोई संबंध नहीं है.
ग्रेटर बांग्लादेश और सल्तनत-ए-बांग्ला का इतिहास
‘सल्तनत-ए-बांग्ला’ या ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ एक विवादित सामाजिक-राजनीतिक अवधारणा है. इसका उद्देश्य बांग्लादेश का ऐसा बड़ा नक्शा तैयार करना है जिसमें पड़ोसी भारत और म्यांमार के कुछ इलाके भी शामिल हों.
इतिहासकार बताते हैं कि इस विचार की जड़ें 1947 के दशक तक जाती हैं. उस समय भारत-पाक विभाजन के दौरान सुभाष चंद्र बोस के भाई शरत चंद्र बोस और मुस्लिम लीग के नेता हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने एक स्वतंत्र और एकजुट बंगाल का प्रस्ताव रखा था. इसे ‘सर्ट फॉर्मूला’ या बंगाल पैक्ट कहा गया. हालांकि, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के विरोध के कारण यह प्रस्ताव सफल नहीं हो सका.
2018 में रब्बीर हुसैन भुइयां ने सबसे पहले ग्रेटर बांग्लादेश का नक्शा बनाया था. इसमें आज के नक्शे की तरह पूर्वी भारत के हिस्सों को बांग्लादेश के विस्तार के तौर पर दिखाया गया.
उस्मान हादी: छात्र आंदोलन से राष्ट्रीय राजनीति तक
हादी 2024 के छात्र विद्रोह के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले नेता बने. इस आंदोलन ने उस समय शेख हसीना की सरकार को सत्ता से हटने के लिए मजबूर कर दिया था. हादी इसके बाद इंकलाब मंच के प्रवक्ता बने और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में आम चुनाव में भाग लिए.
उनकी राजनीतिक शैली तेज-तर्रार और स्पष्ट थी. वह पब्लिक रैलियों में अपने विचार खुलकर व्यक्त करते और शेख हसीना सरकार की नीतियों की आलोचना करते.
हिंसा और आगजनी: राजधानी में तनाव
हादी की मौत के बाद ढाका और अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रुख अपनाया. कुछ प्रदर्शनकारी मीडिया हाउसों, जैसे द डेली स्टार और प्रोथोम आलो, में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे थे.
राजधानी के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने अवामी लीग के स्थानीय कार्यालयों को निशाना बनाया और कुछ स्थानों पर बुलडोजर का इस्तेमाल कर नुकसान पहुंचाया. इस हिंसा के चलते कई पत्रकार और स्टाफ सदस्य सुरक्षित स्थानों पर छिपने को मजबूर हुए.
राजनीतिक अस्थिरता और आगामी चुनाव
बांग्लादेश अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव की तैयारी कर रहा है. हादी की हत्या और उसके बाद की हिंसा ने चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है.
5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाया गया था और तब से मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है. इसके अलावा, मई 2025 में चुनाव आयोग ने अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया और कई वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार किया. इससे हसीना की पार्टी आगामी चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेगी.
ये भी पढ़ें- बांग्लादेश की सबसे काली रात… मीडिया की स्वतंत्रता पर उठे सवाल! 27 साल में पहली बार नहीं छपा ये अखबार