Donald Trump In Davos: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 22 जनवरी 2026, को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित एक अहम अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया. यह कार्यक्रम बोर्ड ऑफ पीस चार्टर से जुड़ा हुआ था, जो वैश्विक स्तर पर शांति और संघर्ष समाधान के उद्देश्य से गठित किया गया है. इससे एक दिन पहले, यानी 21 जनवरी 2026, ट्रंप ने औपचारिक रूप से इस शांति बोर्ड के चार्टर पर अपने हस्ताक्षर किए थे.
यह नई अंतरराष्ट्रीय संस्था दुनिया भर में चल रहे संघर्षों और युद्धों को समाप्त करने की दिशा में काम करेगी. इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का शुल्क तय किया गया है, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा हो रही है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि दुनिया के कई देश इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहते हैं और इसकी शुरुआत बेहद सकारात्मक रही है.
“मिडिल ईस्ट में अब शांति है”
दावोस में अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह बैठक उनके कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक है. उन्होंने इसे “बोर्ड ऑफ पीस” का आधिकारिक और ऐतिहासिक क्षण बताया. ट्रंप के अनुसार, यह बैठक गाजा पीस बोर्ड के औपचारिक गठन का प्रतीक है.
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मिडिल ईस्ट में अब शांति स्थापित हो चुकी है, जो कुछ समय पहले तक अकल्पनीय लग रहा था. ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रयासों से अब तक आठ युद्धों को रोका जा चुका है, और उन्हें उम्मीद है कि एक और बड़ा संघर्ष जल्द समाप्त होने वाला है. उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध का जिक्र करते हुए बताया कि केवल पिछले एक महीने में ही वहां 29,000 लोगों की मौत हुई है, जिनमें अधिकांश सैनिक शामिल थे.
हमास को सख्त संदेश
अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने हमास को लेकर भी सख्त रुख अपनाया. उन्होंने संगठन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमास ने अपने वादों का पालन नहीं किया और हथियार छोड़ने से इनकार किया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. ट्रंप ने कहा कि हमास की पहचान ही हथियारों से जुड़ी रही है, लेकिन अब अगर वे शांति प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बने, तो उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे.
ट्रंप ने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल में 59 देश शामिल हो चुके हैं. उनके मुताबिक, यह भागीदारी इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके प्रस्तावित शांति बोर्ड के समर्थन में खड़ा है.
हस्ताक्षर समारोह और वैश्विक नेताओं की भागीदारी
कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने मंच पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, फिर मुस्कुराते हुए उन्हें कैमरे की ओर दिखाया. इसके बाद अन्य वैश्विक नेता भी क्रमशः मंच पर आए और चार्टर पर हस्ताक्षर किए. यह दृश्य शांति प्रयासों में वैश्विक सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है.
मार्को रुबियो का बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दावोस में आयोजित शांति बोर्ड सम्मेलन में ट्रंप के बाद भाषण दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप शांति स्थापित करने के लिए किसी से भी बातचीत करने को तैयार हैं, चाहे वह कितना ही मुश्किल क्यों न हो. रुबियो ने गाजा में बंधक बनाए गए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा लग रहा था कि इस संकट का कोई समाधान नहीं निकल पाएगा, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं.
कुल मिलाकर, दावोस में हुआ यह सम्मेलन और बोर्ड ऑफ पीस चार्टर की शुरुआत वैश्विक राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है. आने वाले समय में यह पहल अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में कितनी प्रभावी साबित होती है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी.
ये भी पढ़ें- भारत बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था... डेविड रुबेनस्टीन के बयान से फूल जाएंगी चीन-अमेरिका की सांसें!