मैदुगुरी: नाइजीरिया के अशांत पूर्वोत्तर क्षेत्र में आतंक का साया एक बार फिर गहराता जा रहा है. बोर्नो राज्य के एक सुदूर गांव में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में कम से कम 23 नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गई, जबकि कई अन्य को बंधक बना लिया गया है. मृतकों में ज्यादातर किसान और मछुआरे हैं, जो अपने रोज़मर्रा के काम में लगे हुए थे.
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रांत (ISWAP) जैसी कट्टरपंथी ताकतें दोबारा सक्रिय होती दिख रही हैं. स्थानीय सुरक्षा तंत्र के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है.
हमास स्टाइल में किया हमला
गुरुवार सुबह मालम करंती गांव में आतंकवादियों ने हमला किया. गांव के आसपास मौजूद किसानों और मछुआरों को जबरन इकट्ठा किया गया और फिर एक के बाद एक उनकी हत्या कर दी गई. इस दृश्य को देखने वाले चश्मदीद इसे "हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले जैसा ही" मान रहे हैं, जहां निर्दोष नागरिकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया था.
स्थानीय निवासी सानी औवाल ने बताया कि हमलावरों ने एक बुजुर्ग को जानबूझकर जीवित छोड़ दिया, जिसने बाद में अन्य ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी.
शवों तक को कब्जे में लिया
उस्मान अली, जो गांव के ही निवासी हैं, ने कहा कि ग्रामीण जब मारे गए लोगों के शवों को लेने गए, तो आतंकवादियों ने उन्हें खदेड़ दिया. उन्होंने बताया कि हमलावरों ने क्षेत्र को नियंत्रण में लेकर शवों की बरामदगी तक रोक दी, जिससे पीड़ित परिवारों का दुख और बढ़ गया.
बोको हराम की वापसी
बोर्नो राज्य के गवर्नर ने कुछ हफ्ते पहले ही यह स्वीकार किया था कि बोको हराम और ISWAP एक बार फिर अपहरण और हमलों की रणनीति पर लौट आए हैं. यह हमले उसी डरावनी हकीकत की पुष्टि करते हैं. स्थानीय लोग और सुरक्षा विशेषज्ञ अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या नाइजीरिया में आतंकवाद के खिलाफ अब तक की गई सैन्य कार्रवाइयाँ स्थायी समाधान ला पाई हैं?
आतंकवाद का बदलता चेहरा
यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है. 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास ने जो हमला किया था, उसमें 1400 से अधिक लोगों की जान गई थी और 300 से अधिक को बंधक बनाया गया था. आज भी कई बंधक उनकी कैद में हैं.
नाइजीरिया में हुआ यह ताज़ा हमला यह संकेत देता है कि आतंकवादी संगठनों ने आम नागरिकों को डराने के लिए 'बंधक बनाना सामूहिक हत्या' जैसे हथियारों को फिर से अपना लिया है. यह रणनीति सिर्फ नाइजीरिया या इजरायल की नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गहरी चुनौती है.
अब आगे क्या?
नाइजीरिया सरकार पर अब दबाव है कि वह:
संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ से भी अपील की जा रही है कि वे नाइजीरिया में चरमपंथी हिंसा के खिलाफ अधिक प्रभावशाली कार्रवाई करें और इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद करें.
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