Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य विभाग राज्य में लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने जा रहा है. विभाग की ओर से ऐसी कार्रवाई की तैयारी कई महीनों से चल रही थी और अब इस पर अंतिम रूप दे दिया गया है.
राज्य में लगभग 150 से अधिक डॉक्टर ऐसे हैं, जो अपनी जिम्मेदारियों से लगातार दूर रह रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी चिकित्सकों को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का मौका दिया है. अगर डॉक्टर अपने पक्ष में संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ बिहार सेवा संहिता के तहत बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी.
नियम और कानूनी प्रावधान
बिहार सेवा संहिता, 1950 के नियम 74 के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी अगर लगातार पांच साल तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सेवा स्वतः समाप्त हो जाती है. बावजूद इसके, स्वास्थ्य विभाग में कई चिकित्सक नियम और कानून की अवहेलना करते हुए कई सालों से ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं.
कुछ डॉक्टर लगभग नौ साल से ड्यूटी से अनुपस्थित हैं, जबकि कुछ डॉक्टर योगदान करने के बाद बिना किसी सूचना के फिर से ड्यूटी पर नहीं लौटे. इस लंबी अनुपस्थिति से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है और मरीजों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं मिल पाई हैं. अनुपस्थित डॉक्टरों में महिला रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और चिकित्सा पदाधिकारी जैसे उच्च पदस्थ चिकित्सक शामिल हैं.
अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची
स्वास्थ्य विभाग ने इन डॉक्टरों की जानकारी सार्वजनिक करते हुए कई अस्पतालों में पदस्थ चिकित्सकों के नाम उजागर किए हैं. कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:
यह स्थिति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू कार्यप्रणाली के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.
कार्रवाई की प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव उपेंद्र राम ने स्पष्ट किया है कि विभाग द्वारा सभी अनुपस्थित चिकित्सकों को 15 दिनों का समय दिया गया है, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें. इसके बाद विभाग उनके जवाब का विश्लेषण करेगा. अगर डॉक्टर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं या विभाग उनके उत्तर से असंतुष्ट रहता है, तो बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति के साथ उनके खिलाफ सख्त एकतरफा कार्रवाई की जाएगी. इसमें डॉक्टरों की बर्खास्तगी तक शामिल हो सकती है.
इस कदम से यह संदेश जाता है कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग और ईमानदार रहना अनिवार्य है. विभाग का कहना है कि यह केवल ड्यूटी से अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ ही नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम है.
प्रभाव और भविष्य
इस कार्रवाई से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार होने की संभावना है. लंबे समय से अनुपस्थित डॉक्टरों की गैरमौजूदगी से कई अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है. डॉक्टरों की बर्खास्तगी के बाद नए नियुक्ति प्रक्रिया और ड्यूटी में नियमित उपस्थिति से स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी और नियमों का पालन अनिवार्य होगा. विभाग ने कहा कि राज्य में सेवा में अनुशासन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि जनता को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.
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