'दुनिया में जहां भी हिंदू हैं, संघ उनके साथ खड़ा है', बांग्लादेश को मोहन भागवत का संदेश

ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक सफलता और भारत की सैन्य ताकत के प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने देश की सुरक्षा और सामाजिक एकता को लेकर एक अहम संदेश दिया है.

Hindus in world Sangh stands with them Mohan Bhagwat Bangladesh
मोहन भागवत | Photo: ANI

ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक सफलता और भारत की सैन्य ताकत के प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने देश की सुरक्षा और सामाजिक एकता को लेकर एक अहम संदेश दिया है. संघ के अंग्रेज़ी मुखपत्र ‘ऑर्गनाइज़र’ को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत को इस स्तर पर मजबूत होना चाहिए कि कोई भी दुश्मन देश पर हमला करने की हिम्मत न जुटा सके.

“हम आक्रामक नहीं, लेकिन अजेय बनना चाहते हैं”

भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत की ताकत का उद्देश्य दुनिया पर प्रभुत्व जमाना नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति बनाना है जहां सभी को शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिले. उन्होंने कहा, “हम ताकत सिर्फ दिखाने के लिए नहीं चाहते, बल्कि इसलिए चाहते हैं ताकि दुष्ट शक्तियों को रोक सकें और शांति सुनिश्चित कर सकें.”

राष्ट्रीय सुरक्षा: सरकार नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी

भागवत ने सुरक्षा को केवल सरकार या सेना की जिम्मेदारी मानने की सोच को संकीर्ण करार देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है. उनका मानना है कि अगर समाज एकजुट और आत्मनिर्भर हो, तभी वह किसी भी बाहरी या आंतरिक खतरे का सामना कर सकता है.

उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति को अपने स्तर पर सजग और सक्षम बनना होगा. आत्मरक्षा का भाव सिर्फ सेना तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में भी हो. कोई और आपकी सुरक्षा के लिए नहीं आएगा — आपको अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी.”

जातीय एकता, परिवार और पर्यावरण भी सुरक्षा के स्तंभ

मोहन भागवत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखते हुए इसे केवल सैन्य या सीमाओं तक सीमित नहीं माना. उन्होंने जातीय समरसता, पारिवारिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण को भी सुरक्षा के अहम स्तंभ बताया. उनका तर्क है कि “अगर समाज खुद भीतर से बंटा हुआ है, तो वह बाहरी खतरों से कैसे निपटेगा?”

पंच परिवर्तन और आत्मनिर्भरता

संघ प्रमुख ने संघ के "पंच परिवर्तन" दृष्टिकोण को सुरक्षा की बुनियाद बताया और आत्मनिर्भरता पर खास जोर दिया. उन्होंने कहा, “हमें ऐसी तैयारी करनी चाहिए कि कोई भी शक्ति — चाहे अकेली हो या कई मिलकर — भारत को हिला न सके. युद्ध न हो, यही हमारी इच्छा है. लेकिन शांति बनाए रखने के लिए तैयारी भी पूरी होनी चाहिए.”

वैश्विक मंच पर हिंदुओं की स्थिति

भागवत ने विदेशों में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर चिंता जताई, लेकिन साथ ही उम्मीद भी जताई कि अब हिंदू समाज आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो रहा है. उन्होंने खासकर बांग्लादेश में हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अब हिंदू भाग नहीं रहे, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं.

"संघ हर हिंदू के साथ है"

उन्होंने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनियाभर में जहां भी हिंदू हैं, उनकी मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेगा — अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए. उनका कहना था कि संघ का मूल उद्देश्य ही यही है: हिंदू समाज को एकजुट और सशक्त बनाना.

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