कश्मीरी लड़कियां और खुफिया लेटर... दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी अदील से मिला हनीट्रैप का एंगल! क्या था प्लान?

दिल्ली में हुए धमाके की जांच अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ ले चुकी है. सुरक्षा एजेंसियों को गिरफ्तार किए गए व्हाइट कॉलर आतंकी डॉ. अदील अहमद राथर के मोबाइल फोन से ऐसे कई सुराग मिले हैं, जो पूरे नेटवर्क की गहराई और खतरे का संकेत देते हैं.

Honeytrap angle found from Delhi blast terrorist Adil
Image Source: Social Media

दिल्ली में हुए धमाके की जांच अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ ले चुकी है. सुरक्षा एजेंसियों को गिरफ्तार किए गए व्हाइट कॉलर आतंकी डॉ. अदील अहमद राथर के मोबाइल फोन से ऐसे कई सुराग मिले हैं, जो पूरे नेटवर्क की गहराई और खतरे का संकेत देते हैं. अदील के फोन से निकाले गए डेटा में न सिर्फ कश्मीर के युवाओं और छात्रों का बड़ा नेटवर्क मिला है, बल्कि कई कश्मीरी युवतियों के संपर्क नंबर भी मिले हैं, जिनके आधार पर जांच एजेंसियां अब हनीट्रैप एंगल को भी गंभीरता से खंगाल रही हैं.

यह मॉड्यूल सहारनपुर, देवबंद, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच एक संगठित चैन की तरह काम कर रहा था, ऐसा शुरुआती जांच में सामने आया है.

फोन से मिले सैकड़ों संदिग्ध नंबर

अदील की गिरफ्तारी के बाद जब यूपी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसके फोन से मिले कॉन्टैक्ट्स की सूक्ष्म जांच शुरू की, तो बड़ी संख्या में ऐसे नंबर सामने आए जो सहारनपुर, देवबंद और आसपास के इलाकों में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों के थे.

इनमें शामिल हैं—

  • पिलखनी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज के छात्र
  • दारुल उलूम देवबंद के स्टूडेंट
  • सहारनपुर के अन्य मदरसों के विद्यार्थी
  • स्थानीय हॉस्टल और किराये के मकानों में रहने वाले युवक

एजेंसियों का मानना है कि अदील इन युवाओं से लगातार संपर्क में था और उन्हें वैचारिक रूप से प्रभावित, प्रेरित या मॉड्यूल से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा था.

हनीट्रैप का खतनाक एंगल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अदील के फोन में कई युवतियों के नंबर मिले हैं, जिनकी लोकेशन बार-बार जम्मू-कश्मीर की विभिन्न जगहों पर पाई गई.

जांच से जुड़े अधिकारी इस एंगल पर खास ध्यान दे रहे हैं कि—

  • क्या इन युवतियों का इस्तेमाल मोबाइल चैट, कॉल या वीडियो कॉल के जरिए हनीट्रैप रणनीति में किया जा रहा था?
  • क्या मेडिकल कॉलेज, मदरसों और स्थानीय युवाओं को इनकी मदद से फुसलाने या मॉड्यूल तक आकर्षित करने की कोशिश हो रही थी?
  • क्या ये युवतियां किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं?

IB और कश्मीर पुलिस इस एंगल पर समानांतर जांच कर रही हैं.

कश्मीर जाने वाले व्यापारियों से भी जुड़ाव

सहारनपुर के आसपास के इलाके से बड़ी संख्या में लोग लकड़ी, सेब, ड्राई फ्रूट और फर्नीचर कारोबार के लिए जम्मू-कश्मीर जाते हैं. एजेंसियों को शक है कि अदील के नेटवर्क में ऐसे कुछ लोग भी जुड़े हो सकते हैं, जिनकी कश्मीर में अक्सर आवाजाही रहती है.

कई संदिग्ध नंबरों की लोकेशन पिछले कुछ महीनों में—

  • अनंतनाग
  • बांदीपोरा
  • श्रीनगर
  • पुलवामा

जैसे इलाकों में मिली है, जो मॉड्यूल की गतिविधियों पर और सवाल खड़े करती है.

देवबंद का रहस्यमयी लेटर फिर चर्चा में

इस जांच का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुछ समय पहले देवबंद के एक युवक ने गृह मंत्रालय और लोकल पुलिस को लिखित शिकायत भेजी थी.
पत्र में उल्लेख था कि—

  • मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्र
  • कुछ अजनबी युवक
  • और बाहरी फंडिंग के संकेत
  • एक साथ देखे गए थे.

अब अदील की गिरफ्तारी और फोन से मिले डेटा के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर उस पत्र को गंभीरता से लिया गया होता, तो क्या दिल्ली धमाके की साजिश समय रहते उजागर हो सकती थी?

सुरक्षा एजेंसियों ने कसी निगरानी

सहारनपुर के एसएसपी आशीष तिवारी ने बताया कि जिले में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है. उन्होंने कहा, “यूपी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ हर सूचना साझा की जा रही है. कई नए संपर्कों की पुष्टि की जा रही है. बॉर्डर पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ा दी गई है.”

उधर राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी ने कहा कि कॉलेज प्रशासन किसी भी तरह की जांच या दस्तावेज उपलब्ध कराने में पूरी तरह सहयोग करेगा.

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