दुनिया के सबसे व्यस्त और सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में से एक हांगकांग बुधवार की रात अचानक एक भयावह आग के साए में खो गया. ताई पो इलाके में बने वांग फुक कोर्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग इतनी तेज थी कि कुछ ही घंटों में पूरा इलाका आग के गोले में बदल गया. तेज हवा, सूखी मचान और घनी आबादी ने इस हादसे को और भी बड़ा बना दिया. वैश्विक वित्तीय केंद्र कहलाने वाला यह शहर अब अपनी ही असुरक्षा पर चिंता में डूबा है.
35 मंजिला आठ टावरों वाले इस विशाल कॉम्प्लेक्स में करीब दो हजार अपार्टमेंट थे. आग ने इतनी तेजी से फैलकर हालात बिगाड़े कि 44 लोगों की मौत हो गई और 279 से अधिक लोग घायल हो गए. प्राथमिक जांच में एक चौंकाने वाली वजह सामने आई वही बांस की स्कैफोल्डिंग, जो वर्षों से हांगकांग की पहचान मानी जाती है, वही इस त्रासदी की सबसे बड़ी वजह बन गई.
कैसे भड़की इतनी भयानक आग?
मरम्मत कार्य के चलते पूरा कॉम्प्लेक्स बांस की मचान और हरी नेटिंग से ढका था. बांस की मचान पर लगी छोटी सी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया. तेज हवा और सूखा बांस आग को सेकंडों में एक टावर से दूसरे टावर तक खींच ले गए. बांस का स्वभाव ही आग को तेज़ी से ऊपर की ओर पहुँचाना है, और इसी वजह से पूरा कॉम्प्लेक्स आग की ज्वाला में फंस गया.
बांस की मचान: सदियों पुरानी परंपरा, अब जानलेवा जोखिम
हांगकांग बांस की स्कैफोल्डिंग के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. हल्का, सस्ता, मजबूत और जल्दी तैयार होने वाला यह ढांचा शहर की निर्माण संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है. लेकिन अब यही विरासत सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है. बांस अत्यधिक ज्वलनशील होता है, समय के साथ इसकी मजबूती कम होती है और तूफानी हवाओं में इसके टूटने का जोखिम बढ़ जाता है.
सरकार क्यों उठाने जा रही है बड़ा कदम?
हांगकांग सरकार पिछले कुछ वर्षों से धीरे-धीरे बांस की जगह स्टील और मेटल स्कैफोल्डिंग को बढ़ावा दे रही है. अधिकारियों का कहना है कि बांस के ढांचों में कई तकनीकी कमियाँ हैं जिनसे बड़े हादसे हो सकते हैं. तेज़ी से जलने का खतरा, मौसम के प्रभाव से मजबूती कम होना और बड़े टावरों पर काम के दौरान गिरने की घटनाएं. इस हादसे ने सरकार के इरादों को और मजबूत कर दिया है और अब बांस के इस्तेमाल पर बड़ी पाबंदियों की तैयारी तेज हो गई है.
हांगकांग में आग की त्रासदियाँ: इतिहास भी रहा है दर्दनाक
हांगकांग पहले भी बड़ी आग की घटनाओं से गुजर चुका है, लेकिन ताई पो की त्रासदी पिछले 17 वर्षों में सबसे भयानक बताई जा रही है.2008 में मोंग कोक के कॉर्नवाल कोर्ट की आग में 4 लोगों ने जान गंवाई थी. 1962 में शम शुई पो की आग में 44 मौतें हुई थीं और 1948 की आग अब भी शहर की सबसे भीषण त्रासदी है 176 जानें चली गई थीं.
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