भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी एक बार फिर सक्रिय कूटनीति के केंद्र में नजर आई. मॉस्को की यात्रा पर पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब जल्द ही भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन होने वाला है और दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी चल रही है.
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पुतिन से मिलना उनके लिए सम्मान की बात है. उन्होंने राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारियों से अवगत कराया.जयशंकर ने बताया कि बातचीत के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. उनके अनुसार, द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में पुतिन के विचार और मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण हैं.
SCO प्रतिनिधियों के साथ साझा बैठक
इससे पहले जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के सरकारी प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ मिलकर भी पुतिन से मुलाकात की. उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि दोपहर में SCO प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रपति पुतिन से मिलने का अवसर मिला.
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट और कड़ा रुख
SCO सरकार प्रमुखों की परिषद की बैठक में संबोधित करते हुए जयशंकर ने आतंकवाद के मामलों पर भारत के रुख को दोहराया. उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का कोई भी रूप स्वीकार्य नहीं है. इसे न तो अनदेखा किया जा सकता है और न ही किसी तरह का औचित्य दिया जा सकता है.जयशंकर के अनुसार, SCO की स्थापना तीन बड़े खतरों—आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद—का मुकाबला करने के लिए हुई थी. लेकिन समय के साथ ये चुनौतियाँ और गंभीर हो गई हैं. इसलिए अब पूरी दुनिया को आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनानी होगी.
नागरिकों की सुरक्षा—भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है और देश इस अधिकार का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में करेगा. उन्होंने SCO सदस्यों से संगठन के मूल सिद्धांतों पर कायम रहने और समयानुकूल सुधारों पर ध्यान देने की भी अपील की.
मॉस्को में हुई 24वीं SCO बैठक
SCO सरकार प्रमुखों की परिषद की 24वीं बैठक 17 और 18 नवंबर को मॉस्को में आयोजित हुई थी. इस संगठन में भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, कज़ाखिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस सदस्य हैं. इस मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर व्यापक चर्चा होती है, जिसमें भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है.
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