Yemen Airstrip: लाल सागर के तनावपूर्ण समुद्री गलियारे में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है. यमन के ज़ुकार द्वीप पर एक नया एयरस्ट्रिप निर्माणाधीन है, जिसकी पुष्टि हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. यह द्वीप समुद्री परिवहन के लिहाज से बेहद संवेदनशील बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब है, वही इलाका जहां बीते महीनों में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 100 से ज़्यादा वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है.
अब इस इलाके में तेजी से बन रहे एयरस्ट्रिप को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि यह हूती-विरोधी सैन्य गठबंधन की एक नई रणनीतिक तैयारी है, जिसका मकसद न केवल हूती गतिविधियों पर नजर रखना, बल्कि इस इलाके में नौसैनिक नियंत्रण को मजबूत करना भी हो सकता है.
सैटेलाइट से दिखा तेजी से हो रहा निर्माण
प्लैनेट लैब्स PBC द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में अप्रैल 2025 से अब तक ज़ुकार द्वीप पर लगभग 2,000 मीटर लंबा रनवे बनता दिख रहा है. शुरुआत में जमीन समतल की जा रही थी, जबकि अक्टूबर की तस्वीरों में रनवे पर अस्फाल्ट बिछाने और मार्किंग के काम को पूरा होते देखा गया है. हालांकि अब तक किसी भी देश या संगठन ने इस निर्माण की औपचारिक जिम्मेदारी नहीं ली है.
दुबई की कंपनियों की भूमिका पर सवाल
जहाजों की आवाजाही पर नज़र रखने वाले डेटा से पता चलता है कि निर्माण सामग्री ले जाने में कुछ दुबई-आधारित कंपनियां सक्रिय रही हैं. उदाहरण के लिए, ‘Batsa’ नाम का बल्क कैरियर जहाज, जो टोगो के झंडे के तहत पंजीकृत है, ज़ुकार द्वीप के नवनिर्मित घाट पर एक सप्ताह तक खड़ा रहा. यह जहाज सोमालिलैंड के बेरबेरा बंदरगाह से आया था, जिसे DP World नामक दुबई की पोर्ट कंपनी संचालित करती है.
वहीं, एक अन्य दुबई कंपनी Saif Shipping & Marine Services ने स्वीकार किया है कि उसने इस परियोजना के लिए अस्फाल्ट की सप्लाई की थी. यही अस्फाल्ट रनवे निर्माण में इस्तेमाल हुआ माना जा रहा है.
ज़ुकार द्वीप का रणनीतिक महत्व
यह द्वीप हूती नियंत्रण वाले हुदैदा बंदरगाह से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है. 1990 के दशक में इस पर इरिट्रिया ने भी briefly कब्जा किया था, लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय निर्णय के तहत इसे यमन को सौंप दिया गया.
2015 के बाद, जब सऊदी अरब और UAE के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ हस्तक्षेप किया, तब यह द्वीप हूती नियंत्रण से मुक्त करा लिया गया. वर्तमान में यह तारिक सालेह की वफादार यमनी नौसेना के अधीन है, जिन्हें UAE का समर्थन प्राप्त है.
सैन्य रणनीति या हथियार तस्करी पर रोक?
मिडल ईस्ट मामलों की विशेषज्ञ एलेनोरा आर्डेमग्नी के अनुसार, यह एयरस्ट्रिप संभवतः हूतियों द्वारा हथियारों की समुद्री तस्करी रोकने की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है. इससे न सिर्फ उनकी सप्लाई चेन प्रभावित होगी, बल्कि लाल सागर के एक बड़े हिस्से में उनकी गतिविधियों पर नज़र रखना आसान होगा.
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