Houthi Rebels: यमन में ईरान का सबसे बड़ा किला अब उसके हाथ से निकलता नजर आ रहा है. लंबे समय से हूती विद्रोही ईरान के निर्देशानुसार लाल सागर में जहाजों पर निशाना साधते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा. ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने ईरानी आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है और सीधे तौर पर ईरान के अधिकारियों से बातचीत भी बंद कर दी है.
हूती विद्रोही ईरान के लिए प्रॉक्सी की तरह काम करते आए हैं. ईरान ने उन्हें हथियार, मिसाइल और ड्रोन मुहैया कराए और बदले में हूती लाल सागर में इजराइल जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते रहे. 2014 से यमन पर उनका नियंत्रण रहा है और सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों पर भी हमला करते रहे हैं. लेकिन अब हूती ईरान की बजाय अपनी राह चुनने लगे हैं. उनकी रणनीति बदल गई है और वे सीधे संघर्ष से बचते हुए नए सिरे से अपने संगठन को मजबूत कर रहे हैं.
ईरान की कोशिशें फेल
ईरान ने हूती विद्रोहियों को मनाने के लिए कुर्द्स फोर्स के कमांडर अब्दोलरेजा शाहलई को जिम्मा सौंपा. इसके पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक कमांडर भी सना गए थे, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुए. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हूती ऐसे व्यवहार कर रहे हैं, जैसे ईरान कभी उनके संपर्क में था ही नहीं.
इजराइल और अंतर्राष्ट्रीय दबाव
हूती विद्रोहियों के ईरान से दूरी बनाने के पीछे कई बड़े कारण हैं. इजराइल ने 2025 के मध्य तक हमास और हिजबुल्लाह को घुटनों पर ला दिया, उनके शीर्ष कमांडरों को मार गिराया और हूती के दूसरे बड़े कमांडर की हत्या भी की. इन घटनाओं ने हूती को सतर्क कर दिया है.
इसके अलावा, अमेरिका के स्ट्राइक और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में ईरान की कमजोर स्थिति ने हूती को जोखिम लेने से रोक दिया है. रूस और चीन भी खुलकर ईरान का समर्थन नहीं कर रहे, जबकि मिडिल ईस्ट में नए रणनीतिक समीकरण बन रहे हैं.
यमन में बदलते रणनीतिक समीकरण
हूती विद्रोही अब ईरान के नियंत्रण में नहीं रहना चाहते और अपनी स्वतंत्र रणनीति के अनुसार कार्य कर रहे हैं. उनका फोकस सीधे संघर्ष से बचना और संगठन को मजबूत करना है. यह बदलाव न केवल यमन की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि मिडिल ईस्ट के राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगा. ईरान की प्रॉक्सी रणनीति अब चुनौती के दौर से गुजर रही है और हूती विद्रोहियों का नया रुख क्षेत्रीय राजनीति में नए अध्याय लिखने वाला प्रतीत हो रहा है.
यह भी पढ़ें- कौन है भारत में रहने वाला बेनेई मेनाशे समुदाय, जिसके लिए इज़राइल ने खोल दिया खजाना?