Houthi Al-Ghamari Died: पश्चिम एशिया में पहले से जारी भू-राजनीतिक संकट और उथल-पुथल के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पुष्टि की है कि उनके चीफ ऑफ स्टाफ और वरिष्ठ सैन्य रणनीतिकार मुहम्मद अब्द अल-करीम अल-गमारी एक हवाई हमले में मारे गए हैं. हूती प्रवक्ता ने भले ही इजरायल का नाम सीधे तौर पर न लिया हो, लेकिन उनके बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि वे इस हमले को इजरायल द्वारा की गई "प्रतिशोध की कार्रवाई" मान रहे हैं.
गमारी की मौत सिर्फ एक सैन्य नुकसान नहीं, बल्कि हूती संगठन के लिए रणनीतिक झटका मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब संगठन गाजा संकट को लेकर इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रहा था.
इजरायल ने कब और कैसे दिया जवाब?
अगस्त 2025 में, जब गाजा में इजरायल और हमास के बीच टकराव चरम पर था, हूती विद्रोहियों ने यमन से इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं थीं. जवाब में इजरायल ने सना में हवाई हमले किए. उसी कार्रवाई में अल-गमारी, यमन के रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री सहित कई शीर्ष नेता मारे गए थे.
अब जाकर हूती गुट ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अल-गमारी की मौत इजरायली हमले में हुई थी. इस हमले को लेकर इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा, "जो कोई भी हमारी सुरक्षा को चुनौती देगा, उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा."
हूती संगठन के लिए क्यों बड़ा नुकसान है यह?
मुहम्मद अब्द अल-गमारी सिर्फ सैन्य प्रमुख नहीं थे, वह हूती संगठन की रणनीति, युद्ध नीति और अंतरराष्ट्रीय फैसलों के अहम स्तंभ थे. सऊदी अरब के खिलाफ क्रॉस-बॉर्डर अटैक से लेकर गाजा संकट पर संगठन की नीति तय करने तक, अल-गमारी हर बड़े फैसले के पीछे थे. उनकी मौत से संगठन के सैन्य मोर्चे पर कमांड और कंट्रोल में अस्थिरता आने की आशंका जताई जा रही है.
क्या बढ़ेगा संघर्ष?
हूती प्रवक्ता ने बयान में कहा, "हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है. गमारी की शहादत से हमारी इच्छाशक्ति और मजबूत हुई है." यह बयान इस ओर संकेत करता है कि यमन की ओर से इजरायल पर हमलों में और तेज़ी आ सकती है.
साथ ही, संगठन के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने हाल ही में कहा था कि अगर इजरायल गाजा युद्धविराम का पालन नहीं करता है, तो हूती गुट दुबारा हमले शुरू करेगा.