हुसैन सलामी से लेकर मोहम्मद काज़मी तक... ईरान के बड़े सैन्य अधिकारियों को मौसाद ने कैसे निपटाया? जानिए

Mossad Operations In Iran: एक ऐसा मिशन, जिसे अंजाम देते वक्त न गोली की आवाज़ सुनाई दी और न ही किसी हमलावर का चेहरा दिखा. लेकिन जब धुआं छटा, तो ईरान की सैन्य व्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभ ढह चुके थे.

how did Mossad deal with the top military officials of Iran
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Mossad Operations In Iran: एक ऐसा मिशन, जिसे अंजाम देते वक्त न गोली की आवाज़ सुनाई दी और न ही किसी हमलावर का चेहरा दिखा. लेकिन जब धुआं छटा, तो ईरान की सैन्य व्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभ ढह चुके थे.

बीते महीने, इजरायल और ईरान के बीच जो कुछ भी हुआ, वह सिर्फ एक पारंपरिक सैन्य संघर्ष नहीं था, यह मोसाद द्वारा रचा गया एक बेहद सटीक, बहुस्तरीय और अदृश्य खुफिया अभियान था, जिसने दुनिया की सबसे गोपनीय सुरक्षा व्यवस्थाओं में सेंध लगाकर ईरान को हिला दिया.

हुसैन सलामी: सबसे ऊंचा निशाना

ईरान की IRGC के शीर्ष कमांडर हुसैन सलामी को निशाना बनाना, इस मिशन की सबसे साहसी चाल थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद ने सलामी के करीबी एजेंट को अपने जाल में फंसाया और उसी के जरिए एक झूठी बैठक की तारीख लीक करवाई. योजना के मुताबिक, सलामी उस स्थान पर पहुंचे, और वहीं, उनका खात्मा कर दिया गया.

अमीर अली हाजीज़ादेह

IRGC की एयरोस्पेस विंग के प्रमुख हाजीज़ादेह को एक विश्वसनीय फर्जी फोन कॉल के ज़रिए एक ‘गोपनीय बैठक’ में बुलाया गया. जिस कमरे में वह पहुंचे, वहां पहले से ही मौत छिपी हुई थी. जैसे ही वे दाखिल हुए, हमले ने उन्हें और उनके सहयोगियों को खत्म कर दिया.

AI, DNA और ड्रोन

अली शादमानी, जो ईरानी सैन्य योजना के मुख्य रणनीतिकार माने जाते थे, उनकी हत्या में इजरायल ने AI आधारित डीएनए ट्रैकिंग और चेहरे की डिजिटल प्रोफाइलिंग का इस्तेमाल किया. तेहरान के सुरक्षा कैमरा नेटवर्क में डाले गए वायरस ने उनकी गतिविधियों की पूरी निगरानी की, और जाफरानिया ज़िले में एक सटीक ड्रोन स्ट्राइक ने ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया.

कुर्दबाचे की साजिश: मिसाइल ने किया खामोश

IRGC के खुफिया प्रमुख मोहम्मद काज़मी और उनके दो सहयोगियों को भी एक सुरक्षित घर (सेफ हाउस) में बुलाया गया था. उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि उनके लोकेशन की जानकारी पहले से मोसाद के पास है. वहां पहुंचते ही मिसाइलों की बारिश हुई और ऑपरेशन ‘कुर्दबाचे एक्सिक्यूशन’ पूरा हो गया.

साइबर हमलों का कहर

इस फिजिकल ऑपरेशन के समानांतर, इजरायल ने ईरान पर 20,000 से अधिक साइबर हमले किए. ईरानी संचार मंत्री ने खुद स्वीकार किया कि हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डिजिटल ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ. अस्पतालों, सरकारी वेबसाइट्स और सैन्य नेटवर्क्स पर गहरा असर पड़ा.

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