नेपाल, दक्षिण एशिया का एक सुंदर, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध देश, इन दिनों राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक आंदोलनों के बीच चर्चा में है. राजधानी काठमांडू सहित कई हिस्सों में हाल ही में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. खासतौर पर युवाओं, विशेष रूप से Gen-Z की ओर से सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं.
इन हालातों के बीच, देश की धार्मिक संरचना को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है. कई लोग यह जानना चाह रहे हैं कि नेपाल में कौन-कौन से धर्मों के अनुयायी रहते हैं, उनकी जनसंख्या कितनी है और समाज में उनका स्थान कैसा है.
तो आइए नेपाल की धार्मिक विविधता को समझते हैं. हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई और अन्य समुदायों की जनसंख्या और उनके सामाजिक परिदृश्य पर एक गहन नजर डालते हैं.
कुल जनसंख्या और धर्मों का अनुपात
नेपाल की कुल जनसंख्या 2021 की जनगणना के अनुसार लगभग 2.97 करोड़ है. यह जनसंख्या विभिन्न जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों में विभाजित है. लंबे समय तक नेपाल को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया.
धर्मनिरपेक्षता अपनाने के बाद भी नेपाल में आज भी हिंदू धर्म का दबदबा है, लेकिन धीरे-धीरे यहां धार्मिक विविधता में वृद्धि देखी जा रही है.
नेपाल में हिंदू अब भी बहुसंख्यक
नेपाल की कुल जनसंख्या में 81.19% लोग हिंदू धर्म का पालन करते हैं. इसका अर्थ है कि लगभग 2 करोड़ 36 लाख से अधिक लोग खुद को हिंदू मानते हैं. यह नेपाल को दुनिया के हिंदू बहुल देशों में सबसे ऊपर रखता है.
हालांकि, 2011 की तुलना में हिंदू जनसंख्या के प्रतिशत में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 2011 में यह अनुपात 81.3% से थोड़ा ऊपर था, जबकि 2021 में यह घटकर 81.19% पर आ गया है. गिरावट मामूली है, लेकिन यह धार्मिक प्रवृत्तियों में हो रहे बदलाव की ओर संकेत करती है.
सामाजिक स्थिति:
नेपाल में मुस्लिम समुदाय की बढ़ रही जनसंख्या
मुस्लिम समुदाय नेपाल की तीसरी सबसे बड़ी धार्मिक जनसंख्या है. 2021 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल आबादी में 5.09% मुस्लिम हैं, जो कि लगभग 14.83 लाख के करीब है.
2011 में यह आंकड़ा 4.4% था, यानी पिछले दशक में मुस्लिम आबादी में लगभग 0.69% की वृद्धि हुई है.
कहां रहते हैं ज़्यादातर मुस्लिम?
नेपाल के तराई क्षेत्र (जो भारत की सीमा से सटा हुआ है) में मुस्लिम आबादी का घनत्व सबसे अधिक है.
आंकड़ों के अनुसार, करीब 95% मुस्लिम इसी क्षेत्र में रहते हैं.
ये इलाके सांस्कृतिक रूप से भारतीय राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश से मेल खाते हैं.
मुस्लिमों की सामाजिक स्थिति:
अधिकतर मुस्लिम समुदाय कृषि, छोटे व्यापार, और स्थानीय सेवा क्षेत्रों में कार्यरत हैं.
सामाजिक पहचान और राजनैतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं.
बौद्ध धर्म दूसरी सबसे बड़ी धार्मिक जनसंख्या
नेपाल का ऐतिहासिक गौरव यह है कि यह गौतम बुद्ध की जन्मभूमि (लुंबिनी) है, जिसके कारण यहां बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव रहा है.
2021 की जनगणना के अनुसार, 8.2% लोग बौद्ध धर्म का पालन करते हैं, जो कि लगभग 23.94 लाख लोग हैं. हालांकि, 2011 की तुलना में बौद्ध धर्म मानने वालों की संख्या में 0.79% की कमी देखी गई है.
कहां फैली है बौद्ध जनसंख्या?
बौद्ध अनुयायी मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्र, शेरपा, तामांग, गुरूंग जैसे जातीय समूहों से आते हैं.
इनकी बड़ी संख्या पश्चिमी और उत्तरी नेपाल में रहती है.
किरात नेपाल के मूल निवासियों का धर्म
किरात धर्म नेपाल के मूल जनजातीय समुदायों द्वारा अपनाया गया एक प्राचीन धार्मिक पद्धति है. इसका अनुकरण मुख्यतः राय, लिंबू, याक्खा जैसे आदिवासी समूह करते हैं.
जनगणना के अनुसार, करीब 3% से भी कम लोग किरात धर्म के अनुयायी हैं, लेकिन इसमें 0.17% की वृद्धि हुई है, जो यह दिखाता है कि लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जुड़ने लगे हैं.
ईसाई समुदाय तेजी से बढ़ता लेकिन छोटा समूह
नेपाल में ईसाई धर्म का अनुयायियों का अनुपात अब भी बहुत कम है, लेकिन इसमें उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. 2011 से 2021 के बीच ईसाई जनसंख्या में 0.36% की वृद्धि हुई है.
अभी भी ईसाई समुदाय नेपाल की कुल जनसंख्या का एक छोटा हिस्सा हैं, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक परिवर्तन (conversion) की घटनाओं के कारण यह मुद्दा कई बार विवादों में रहा है.
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