Iran-US War: 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए युद्ध में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, लेकिन ईरान ने अपनी मजबूत रणनीतियों और पलटवार से अमेरिका को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है. पिछले 35 दिनों में हुए संघर्ष में ईरान ने अमेरिका की सैन्य ताकत को कई मोर्चों पर चोट पहुँचाई है. आइए, जानते हैं कि इस युद्ध में ईरान ने अमेरिकी सेना को किन मोर्चों पर नुकसान पहुँचाया और कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है.
सैनिकों की हानि
जंग के पहले महीने में ही अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है. 28 फरवरी से युद्ध की शुरुआत के बाद, अब तक 300 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है. 1 मार्च को कुवैत के शुएबा बंदरगाह पर हुए एक ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. इसके बाद, 12 मार्च को पश्चिमी इराक में एक KC-135 टैंकर विमान दुर्घटना का शिकार हुआ, जिसमें सवार सभी 6 अमेरिकी क्रू मेंबर्स की मौत हो गई. पेंटागन ने इस घटना को दुश्मन के हमले से जोड़ने से इंकार किया, लेकिन यह हादसा निश्चित रूप से अमेरिकी सेना के लिए एक बड़ा झटका था.
सैन्य ठिकानों पर हमला
ईरान ने अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में कुल 13 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला हुआ, जिससे इन ठिकानों को भारी नुकसान हुआ. कुवैत के शुएबा बंदरगाह पर हुए हमले में अमेरिकी सेना का टैक्टिकल ऑपरेशन सेंटर पूरी तरह तबाह हो गया, और छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. कतर के अल उदीद एयर बेस पर रडार सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, जबकि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिकी वायुसेना के पांच एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को नष्ट कर दिया.
विमानों और हथियारों का नुकसान
ईरान के हमलों ने अमेरिकी एयरफोर्स को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है. युद्ध के दौरान अब तक 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं, जिनमें कुवैत में तीन F-15 लड़ाकू विमान, दो F-35 और एक F-15E शामिल हैं. सऊदी बेस पर हुए हमले में अमेरिकी का सबसे ताकतवर निगरानी विमान E-3 सेंट्री (AWACS) भी तबाह हो गया. इसके अलावा, करीब एक दर्जन MQ-9 रीपर ड्रोन भी नष्ट हो गए हैं. ईरान ने जंग के पहले चार दिनों में ही करीब 2 अरब डॉलर के सैन्य उपकरणों को नष्ट कर दिया था, जिनमें THAAD रक्षा प्रणाली और हाईटेक रडार भी शामिल थे.
आर्थिक नुकसान
जंग के शुरुआती 2 हफ्तों में ही अमेरिका को करीब 800 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो भारतीय मुद्रा में करीब 7,360 करोड़ रुपये के बराबर है. अब तक, अमेरिका को युद्ध में 2.9 बिलियन डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है. ईरान ने अपनी सबसे बड़ी चाल के रूप में होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई. अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी के अनुसार, अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए हर दिन 2 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है, यानी करीब 18.4 हजार करोड़ रुपये.
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