खाड़ी देशों ने इजरायल के खिलाफ शुरू की गोलबंदी, कतर में हमास पर हमले का जवाब कैसे देंगे मुस्लिम देश?

दोहा पर इज़रायली एयरस्ट्राइक ने पूरी मुस्लिम दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. इस हमले ने न सिर्फ कतर की संप्रभुता पर चोट पहुंचाई, बल्कि खाड़ी देशों के बीच एक नई प्रकार की एकता भी जन्म दी है.

How will Muslim countries respond to the attack on Qatar
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

दोहा पर इज़रायली एयरस्ट्राइक ने पूरी मुस्लिम दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. इस हमले ने न सिर्फ कतर की संप्रभुता पर चोट पहुंचाई, बल्कि खाड़ी देशों के बीच एक नई प्रकार की एकता भी जन्म दी है. पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे शक्तिशाली मुस्लिम राष्ट्र अब खुलकर कतर के समर्थन में उतर आए हैं और इज़रायल के खिलाफ मोर्चा खोलने की बातें सामने आने लगी हैं.

इस हमले के बाद अब सवाल सिर्फ इज़रायल की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ये पूछा जा रहा है कि क्या मुस्लिम देश अब इज़रायल को सामूहिक जवाब देंगे? और क्या यह जवाब सैन्य होगा या कूटनीतिक?

क्या हुआ कतर में?

मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में इज़रायल ने एक हवाई हमला किया, जिसका निशाना थे हमास के राजनीतिक नेता. यह हमला उस समय किया गया जब हमास के कुछ अधिकारी दोहा में एक बैठक कर रहे थे.

इस हमले में:

  • 6 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक कतरी सुरक्षा अधिकारी भी शामिल था.
  • हालांकि, हमास के शीर्ष नेताओं की मौत की पुष्टि नहीं हुई है.

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुले तौर पर हमले की जिम्मेदारी ली और कतर को चेतावनी दी कि "हमास की मेजबानी बंद करो, वरना अगला निशाना और सटीक होगा."

खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया: एकजुटता या युद्ध?

पाकिस्तान

पाकिस्तान शुरू से ही हमास और फिलिस्तीन के समर्थन में रहा है. इस बार भी पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इज़रायल की कार्रवाई को "पूरी मुस्लिम दुनिया पर हमला" बताया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के जल्द ही दोहा पहुंचने की खबर है.

सऊदी अरब

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान खुद दोहा जाने वाले हैं. यह बेहद अहम है क्योंकि सऊदी अरब और कतर के संबंध पहले कुछ सालों से तनावपूर्ण रहे हैं. इज़रायली हमले ने उन्हें एकजुट होने का मौका दे दिया है.

संयुक्त अरब अमीरात

यूएई, जिसने हाल ही में इज़रायल से रिश्ते सामान्य किए थे, उसने भी इस हमले की आलोचना की है. यूएई के राष्ट्रपति दोहा का दौरा करने वाले हैं- यह संदेश साफ है कि इस हमले को हल्के में नहीं लिया गया है.

तुर्की

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने इज़रायल की हरकत को "मध्य-पूर्व की शांति पर हमला" बताया है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके खिलाफ अभियान चलाने की बात की है.

मुस्लिम देशों में बढ़ती गोलबंदी

इस हमले ने खाड़ी और मुस्लिम देशों में 'साझा आक्रोश' पैदा कर दिया है. दुश्मन देश आपसी मतभेदों को भूलाकर अब कतर के साथ खड़े होते दिख रहे हैं. इक्वल फूटिंग पर बातचीत, संयुक्त निंदा प्रस्ताव और कूटनीतिक लामबंदी जैसे कदम तेजी से लिए जा रहे हैं.

यह वही क्षेत्र है जहां कतर, सऊदी और यूएई के बीच वर्षों तक खींचतान चली है, लेकिन अब इज़रायल ने एक ऐसा हमला कर दिया जिसने उन्हें साथ ला दिया है.

क्या कतर देगा सैन्य जवाब?

कतर की रणनीति हमेशा से ही कूटनीति, मीडिया और वैश्विक कानून रही है. यहां तक कि जब ईरान ने अल उदीद अमेरिकी बेस पर हमला किया था, तब भी कतर ने संतुलित रुख अपनाया था.

कतर ने साफ कर दिया है कि:

  • वह सीधे सैन्य टकराव में नहीं जाएगा
  • उसका जवाब होगा कानूनी और कूटनीतिक

उसने एक स्पेशल लीगल टीम बनाई है जो इज़रायल पर अंतरराष्ट्रीय मुकदमा दायर करने की तैयारी में है

अमेरिका की भूमिका पर सवाल

इस हमले को लेकर अमेरिका ने खुद को अलग कर लिया है, लेकिन कतर ने बड़ी नाराज़गी के साथ कहा है कि अमेरिका ने इस हमले की कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी थी.

विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा, "हमें अमेरिका की ओर से हमले के 10 मिनट बाद सूचना मिली. इससे पहले कुछ नहीं."

इस बयान से अमेरिका की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है, क्योंकि कतर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है और यहां 8000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं.

क्यों नहीं पकड़ पाई कतर की रडार सिस्टम?

कतर की रक्षा प्रणाली में अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल है, जिसने ईरान के मिसाइल हमले को पहले सफलतापूर्वक रोका था. लेकिन इस बार इज़रायल ने ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया:

  • जिसे रडार पकड़ नहीं सके
  • जिसकी रेंज कम लेकिन टारगेटिंग अधिक सटीक थी
  • और जिसने पूर्व चेतावनी सिस्टम को चकमा दे दिया

यह एक नया खतरा है, जिससे कतर अब खुद को बचाने की रणनीति पर काम कर रहा है.

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