भारत की सुरक्षा रणनीति को लेकर एक नई चुनौती उभरती नजर आ रही है, जो किसी सीमाई संघर्ष की शुरुआत नहीं, बल्कि धीमी गति से तैयार हो रहे एक दीर्घकालिक रणनीतिक खतरे की आहट दे रही है. यह खतरा बांग्लादेश के लालमोनिरहाट एयरबेस से जुड़ा है, जो भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा से महज़ 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
लालमोनिरहाट एयरबेस का महत्व
बांग्लादेश का लालमोनिरहाट एयरबेस, जो पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के नजदीक स्थित है, हाल ही में चर्चा में आया है क्योंकि वहां एक विशाल हैंगर (विमान शेड) का निर्माण तेज़ी से जारी है. इस हैंगर का इस्तेमाल लड़ाकू विमानों को पार्क करने और संभावित सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है.
इस स्थान की संवेदनशीलता इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि यह भारत के ‘चिकन नेक’ या सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक है, एक मात्र भू-भाग जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से इतना अहम है कि यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां गंभीर नजर बनाए रखती हैं.
हैंगर निर्माण और सैन्य तैयारियों की रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, लालमोनिरहाट एयरबेस पर बन रहे इस हैंगर की छत पर कार्य तेज़ी से चल रहा है, और यह संरचना इतनी बड़ी है कि इसमें 10 से 12 लड़ाकू विमान आसानी से रखे जा सकते हैं. अनुमान है कि इसका उपयोग भविष्य में J-10CE या JF-17 जैसे चीनी और पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के लिए किया जा सकता है.
इस निर्माण को बांग्लादेश वायुसेना नियंत्रित कर रही है, और यह माना जा रहा है कि यह विकास मोहम्मद यूनुस सरकार के आने के बाद तेजी से हुआ है, जिनके शासनकाल में चीन और पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं.
2.2 अरब डॉलर का J-10CE सौदा
बांग्लादेश reportedly 20 चीनी J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह वही विमान है जिसे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) अपनी अग्रिम पंक्ति की वायु शक्ति के रूप में इस्तेमाल करता है.
इसके साथ ही बांग्लादेश ने JF-17 लड़ाकू विमान (जो पाकिस्तान और चीन का संयुक्त प्रोजेक्ट है) में भी रुचि दिखाई है.
इन सौदों को ध्यान में रखते हुए लालमोनिरहाट एयरबेस पर बन रहा हैंगर इन विमानों की तैनाती के लिए उपयुक्त आधारभूत संरचना तैयार करने जैसा दिखता है.
एयरबेस में 4 किलोमीटर लंबा रनवे
यह एयरबेस 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में बनाया गया था और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा इस्तेमाल किया गया था. वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद अब इसे एक सक्रिय और आधुनिक सैन्य बेस में बदला जा रहा है.
बेस का कुल क्षेत्रफल 1,166 एकड़ है और इसमें 4 किलोमीटर लंबा रनवे है, जो किसी भी बड़े विमान के उतरने के लिए पर्याप्त है.
भारत की बढ़ती चिंताएं
लालमोनिरहाट एयरबेस की लोकेशन भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है:
यूनुस सरकार और विवादास्पद बयान
प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की सरकार में आने के बाद से बांग्लादेश की सैन्य और विदेश नीति में नए तेवर दिखाई दे रहे हैं. यूनुस कई बार भारत के रणनीतिक क्षेत्रों जैसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर का जिक्र अपने भाषणों में कर चुके हैं, जिससे नई दिल्ली की चिंताएं और गहरी हो गई हैं.
भारत के नीति-नियंता मानते हैं कि बांग्लादेश अब केवल एक पड़ोसी नहीं, बल्कि संभावित रणनीतिक चुनौती बनता जा रहा है, खासकर जब वह चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ मिलिट्री कोऑपरेशन में तेजी दिखा रहा है.
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