नई दिल्ली: एशिया कप में भारत से हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने जो हंगामा खड़ा किया, वह अंततः उसी पर भारी पड़ गया. यूएई के खिलाफ मैच खेलने से मना करना, रेफरी को बदलने की मांग और बॉयकॉट की धमकी इन सब कोशिशों के बावजूद PCB को अपने फैसले पर पीछे हटना पड़ा. इसकी वजह141 करोड़ रुपये का भारी भरकम नुकसान है.
रेफरी बदलो या बॉयकॉट
भारत के खिलाफ मैच के बाद पाकिस्तान ने मैच रेफरी एंडी पाइक्रोफ्ट को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि यदि उन्हें UAE के खिलाफ मैच से नहीं हटाया गया, तो वे मुकाबला नहीं खेलेंगे और पूरे एशिया कप से बॉयकॉट कर लेंगे. PCB ने दावा किया कि पाइक्रोफ्ट की भूमिका पक्षपातपूर्ण रही है. लेकिन न तो रेफरी बदले गए और न ही पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर हुआ.
क्यों पड़ी पीछे हटने की नौबत?
इस पूरे विवाद के पीछे सबसे बड़ी वजह पैसे का नुकसान होना था. अगर पाकिस्तान एशिया कप से बाहर हो जाता, तो PCB को लगभग 141 करोड़ रुपये (16 मिलियन USD) का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता. यह राशि ब्रॉडकास्टिंग, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से मिलने वाले रेवेन्यू का हिस्सा है.
ACC (एशियन क्रिकेट काउंसिल) एशिया कप से होने वाली कुल आय का 75% हिस्सा भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को बराबर-बराबर (15% प्रति देश) बांटती है. ऐसे में PCB ने बड़ा नुकसान होने से पहले ही बॉयकॉट का फैसला वापिस ले लिया.
“नो हैंडशेक” ड्रामे ने बढ़ाया तमाशा
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच में जब भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया, तो इस पर भी पाकिस्तान ने बवाल खड़ा कर दिया. आरोप लगाया गया कि मैच रेफरी एंडी पाइक्रोफ्ट ने ही खिलाड़ियों को हैंडशेक से रोका. पाकिस्तान ने इसकी शिकायत ICC से की, लेकिन जांच के बाद ICC ने पाइक्रोफ्ट को क्लीन चिट दे दी और साफ कहा कि रेफरी ने कोई नियम नहीं तोड़ा.
आखिर में पाकिस्तान ही हुआ शर्मिंदा
अपनी बात मनवाने के लिए पाकिस्तान ने जितना ज़ोर लगाया, अंत में उतनी ही बेइज्जती झेलनी पड़ी. न रेफरी बदले गए, न विरोध सफल हुआ और न ही कोई बॉयकॉट. उल्टा, सोशल मीडिया और इंटरनेशनल मीडिया में PCB की काफी आलोचना हुई. साफ है, जब दांव पर करोड़ों रुपये हों, तो धमकी की राजनीति भी बैकफायर कर जाती है.
ये भी पढ़ें: सूर्यकुमार यादव और सलमान आगा ने क्यों नहीं मिलाया हाथ, दोनों टीमों को किसने किया था मना? खुल गया राज