पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक हालत किसी से छिपी नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताज़ा आकलन रिपोर्ट ने एक बार फिर इस पड़ोसी देश की वास्तविक स्थिति पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट कर दी है. रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान बेहद कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है, जहां कर्ज, महंगाई, गिरती वृद्धि दर और राजनीतिक अस्थिरता ने मिलकर उसकी अर्थव्यवस्था को जकड़ लिया है.
IMF ने माना है कि पाकिस्तान ने हाल के महीनों में कुछ अल्पकालिक स्थिरता हासिल की है- जैसे विदेशी मुद्रा भंडार में मामूली सुधार और आयात प्रबंधन लेकिन कुल मिलाकर देश की आर्थिक सेहत अभी भी “नाजुक” स्थिति में है. IMF ने पाकिस्तान को लगभग 1.2 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता भी मंजूर की है, जो देश को अस्थाई राहत तो दे सकती है, लेकिन स्थाई समाधान अभी भी दूर है.
प्रति व्यक्ति आय में कोई बढ़ोतरी नहीं
IMF के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर अगले वित्तीय वर्ष 2025–26 में करीब 3.2% रहने की उम्मीद है. यह पिछले वित्त वर्ष की 2.6% वृद्धि से बेहतर जरूर है, लेकिन पाकिस्तान की आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है- करीब 2.55%, उसके मुकाबले यह वृद्धि लगभग बराबर ही है. इसे आर्थिक भाषा में “जैसा-तैसा सुधार” ही कहा जा सकता है क्योंकि इससे प्रति व्यक्ति आय में कोई महत्वपूर्ण बढ़ोतरी नहीं होती.
प्रति व्यक्ति आय: सुधार की रफ्तार बेहद धीमी
पाकिस्तान की मौजूदा प्रति व्यक्ति आय लगभग 1,677 डॉलर है. IMF के अनुसार, इतनी कम वृद्धि दर के साथ प्रति व्यक्ति आय में तेज़ सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती. अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, यह आय देश की आर्थिक रुकावट और रोजगार के कम अवसरों को साफ तौर पर दर्शाती है.
महंगाई में गिरावट, लेकिन खतरा अभी भी मौजूद
IMF की रिपोर्ट में यह जरूर दर्ज है कि 2023–24 में जहां पाकिस्तान की मुद्रास्फीति लगभग 23.4% तक पहुंच गई थी, वहीं अगले साल यह घटकर 4.5% पर आ गई. यह सुधार आम नागरिकों को कुछ राहत देता है, लेकिन यह राहत स्थाई नहीं हो सकती. संस्था का अनुमान है कि 2025–26 में महंगाई फिर बढ़कर 6.3% तक जा सकती है.
यह बढ़ोतरी संकेत देती है कि पाकिस्तान की आर्थिक नीतियाँ अभी भी स्थिरता पैदा करने में सफल नहीं हो पाई हैं.
भारी कर्ज और निवेश की कमी
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती उसका भारी बाहरी कर्ज है. देश लगातार कर्ज लेकर ही अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है. इसके अलावा निवेश वातावरण बेहद कमजोर है- विदेशी निवेशक राजनीतिक अस्थिरता और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण पाकिस्तान में पूंजी लगाने से बच रहे हैं.
नतीजतन, रोजगार सृजन बहुत धीमा है और आर्थिक गतिविधियाँ सीमित दायरे में सिमटती जा रही हैं.
आर्थिक सुधार: रास्ता लंबा और मुश्किल
IMF ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान वर्तमान संकट से उबरने के लिए केवल बाहरी कर्ज या सहायता पर निर्भर नहीं रह सकता. उसके लिए ज़रूरी है—
IMF ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान अभी “तात्कालिक संकट टाल देने” की स्थिति में है, लेकिन “दीर्घकालिक सुधार” की दिशा में कदम बहुत धीमे हैं.
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