केंद्र सरकार अगले बजट में आम करदाताओं को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है. बजट पेश होने में अब केवल तीन महीने बचे हैं और उद्योग जगत ने सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव भेजे हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख सिफारिश पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की है, जिसने वित्त मंत्रालय से अपील की है कि 50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर टैक्स दरों में कटौती की जाए.
उद्योग संगठन का कहना है कि मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ घटाया जाना चाहिए ताकि लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़े और अर्थव्यवस्था में मांग को बल मिले. यदि सरकार इन सिफारिशों पर गौर करती है, तो साल 2026 के बजट में आयकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
50 लाख तक की आय पर टैक्स फ्री होने की उम्मीद
PHDCCI ने अपने सुझाव में कहा है कि वर्तमान में नए टैक्स रेजीम (New Tax Regime) में 30% की उच्चतम टैक्स दर 24 लाख रुपये से अधिक आय पर लागू होती है. संगठन ने सुझाव दिया है कि इस सीमा को बढ़ाकर 50 लाख रुपये सालाना किया जाए. यानी 50 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यक्तियों पर 30% की ऊंची टैक्स दर न लगाई जाए.
संगठन ने राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा है कि यदि यह सीमा बढ़ाई जाती है, तो इससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी और आयकर अनुपालन भी बेहतर होगा. साथ ही, अधिक लोगों को नए टैक्स रेजीम की ओर आकर्षित किया जा सकेगा.
कॉरपोरेट टैक्स घटाने की भी सिफारिश
उद्योग संगठन ने सिर्फ व्यक्तिगत करदाताओं के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए भी राहत की मांग की है. PHDCCI ने कहा है कि सरकार को कॉरपोरेट टैक्स को 25% से घटाकर 22% या उससे कम करने पर विचार करना चाहिए.
रिपोर्ट के अनुसार, जब कॉरपोरेट टैक्स दर पहले 35% से घटाकर 25% की गई थी, तो टैक्स कलेक्शन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. वर्ष 2018-19 में टैक्स कलेक्शन जहां ₹6.63 लाख करोड़ था, वहीं यह अब ₹8.87 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है. उद्योग जगत का मानना है कि टैक्स दरों में और कमी करने से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कंपनियों को विस्तार की दिशा में मदद मिलेगी.
पर्सनल टैक्स पर 39% तक का बोझ
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में व्यक्तिगत आयकर की अधिकतम दर 30% है, लेकिन सरचार्ज और सेस मिलाकर यह 39% तक पहुंच जाती है. इसका मतलब है कि कुछ करदाताओं को अपनी कुल आय का लगभग 40% हिस्सा सरकार को देना पड़ता है.
PHDCCI ने सुझाव दिया है कि —
संगठन का मानना है कि ऐसी टैक्स संरचना से न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि खपत और निवेश दोनों में तेजी आएगी.
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