Independence Day 2025: अपने भाषण में मोदी ने आरएसएस को "दुनिया का सबसे बड़ा NGO" बताते हुए उसकी विशेषताओं को रेखांकित किया, सेवा, समर्पण, संगठन और अनुशासन. उन्होंने कहा कि व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की जो संकल्पना संघ ने उठाई, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.
स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह शायद पहली बार हुआ जब देश के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के दिन, देश की सबसे प्रमुख राजनीतिक और वैचारिक संस्था बीजेपी के वैचारिक स्रोत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लेकर उसका खुले मंच पर गुणगान किया. यह न केवल संघ के लिए एक प्रतीकात्मक सम्मान है, बल्कि उन लाखों स्वयंसेवकों के लिए भी भावनात्मक क्षण है जिन्होंने दशकों तक संगठन के लिए कार्य किया.
अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन
प्रधानमंत्री ने कहा कि संघ की यह शताब्दी यात्रा केवल संगठन निर्माण नहीं, बल्कि मां भारती के कल्याण का अभियान रही है. राष्ट्र सेवा को जीवन का लक्ष्य मानने वाले स्वयंसेवकों के त्याग, अनुशासन और निस्वार्थ योगदान को उन्होंने खुले दिल से सराहा.
राजनीति से ऊपर उठकर संस्था का सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान केवल एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि भारत की वैचारिक विविधताओं को अब मुख्यधारा में स्वीकार किया जा रहा है. आरएसएस, जो कई दशकों तक विवादों और आलोचनाओं का केंद्र रहा, अब शताब्दी वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर एक सम्मानित संस्था के रूप में स्थापित हो रहा है.
संघ की मान्यता, एक नई शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लाल किले से आरएसएस का उल्लेख यह दर्शाता है कि भारत का राजनीतिक विमर्श अब केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठन और वैचारिक सेवा की भूमिका को भी मान्यता दी जा रही है. यह एक ऐसा क्षण है जो भविष्य में संघ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा.
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