दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ताकत बना भारत, ऑपरेशन सिंदूर ने बनाया सुपरपावर, लिस्ट में पाकिस्तान कहां?

वैश्विक मंच पर किसी देश की ताकत सिर्फ उसके पास मौजूद हथियारों या उसके आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती.

India becomes the third largest power in the world
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

Most Powerful Nation: वैश्विक मंच पर किसी देश की ताकत सिर्फ उसके पास मौजूद हथियारों या उसके आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती. असल शक्ति कई आयामों का मिश्रण है- कूटनीतिक प्रभाव, सैन्य क्षमता, आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक पहचान, तकनीकी प्रगति और रणनीतिक नेटवर्क. यही विभिन्न पहलू मिलकर तय करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संतुलन में कौन-सा राष्ट्र किस स्थान पर खड़ा है.

हाल ही में जारी लोवी इंस्टीट्यूट का Asia Power Index 2025 इस बात का ताजा उदाहरण है. इस रिपोर्ट ने एशिया के 27 देशों की सामूहिक ताकत को आठ अलग-अलग मानकों पर परखते हुए भारत को एशिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली ताकत के रूप में रैंक किया है. यह उपलब्धि न केवल भारत की उभरती वैश्विक स्थिति को दर्शाती है, बल्कि भू-राजनीतिक रूप से भी एशिया में नए समीकरणों का संकेत देती है.

शक्ति का आकलन किन आधारों पर होता है?

लोवी इंस्टीट्यूट के विश्लेषण में देशों की ताकत को आठ अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है. ये पैरामीटर किसी देश की समग्र क्षमता का आकलन करते हैं- युद्धकाल से लेकर शांति के समय की रणनीतिक क्षमता तक. वे आयाम इस प्रकार हैं:

  • आर्थिक शक्ति (Economic Capability)
  • सैन्य क्षमता (Military Capability)
  • रक्षा नेटवर्क और साझेदारी (Defence Networks)
  • कूटनीतिक प्रभाव (Diplomatic Influence)
  • भविष्य की क्षमता (Future Resources)
  • सांस्कृतिक प्रभाव / सॉफ्ट पावर (Cultural Influence)
  • लचीलापन और स्थिरता (Resilience)
  • आर्थिक व राजनीतिक प्रभावशीलता (Economic Relationships)

इन्हीं आठ स्तंभों पर भारत ने 40.0 का स्कोर हासिल कर खुद को “मेज़र पावर” की श्रेणी में मजबूती से स्थापित किया है.

भारत तीसरे स्थान पर कैसे पहुंचा?

1. सैन्य शक्ति: आधुनिकता की ओर बड़ा कदम

भारत की सैन्य ताकत में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

  • लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली
  • उन्नत लड़ाकू विमान
  • पनडुब्बी क्षमता
  • नेटवर्क-केंद्रित युद्ध (network centric warfare) तकनीक
  • अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणाली

इन सभी ने भारत की रक्षा तैयारी को नए स्तर पर पहुंचा दिया है. तीनों सेनाओं में आधुनिकीकरण ने भारत की सैन्य पहुंच, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में, और भी मजबूत की है.

2. आर्थिक शक्ति: तेज़ी से उभरता दिग्गज

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. GDP में लगातार वृद्धि, टेक्नोलॉजी क्षेत्र में भारी निवेश, और डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार, इन सबने भारत को आर्थिक रूप से अधिक प्रभावशाली बनाया है.

  • भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम
  • वैश्विक IT और टेक्नोलॉजी में अग्रणी भूमिका
  • ऊर्जा सुरक्षा पर रणनीतिक निवेश
  • वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती भूमिका

आर्थिक मोर्चे पर ये कदम भारत की दीर्घकालिक शक्ति को मजबूत करते हैं.

3. कूटनीतिक प्रभाव: बहुपक्षीय मंचों में निर्णायक भूमिका

भारत दुनिया के कई महत्वपूर्ण गठबंधनों का हिस्सा है- SCO, BRICS, QUAD, G20 आदि. कूटनीति के क्षेत्र में भारत ने लगातार एक संतुलित और स्वतंत्र नीति अपनाई है.

  • पश्चिमी देशों के साथ स्थिर रिश्ते
  • रूस के साथ मजबूत साझेदारी
  • ASEAN राष्ट्रों के साथ बढ़ता सहयोग
  • वैश्विक दक्षिण (Global South) का नेतृत्व

भारत की यह रणनीतिक कूटनीति इसे एशिया में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है.

4. सांस्कृतिक शक्ति: भारत सॉफ्ट पॉवर

भारत की पहचान केवल राजनीतिक या सैन्य ताकत से नहीं बनती, बल्कि इसकी सांस्कृतिक विरासत भी वैश्विक प्रभाव का एक बड़ा स्रोत है.

  • योग
  • बॉलीवुड
  • भारतीय भोजन
  • भारतीय भाषा और साहित्य
  • वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय

इन सबने भारत को सॉफ्ट पावर की सूची में शीर्ष देशों में शामिल किया है.

5. भविष्य की क्षमता: टेक्नोलॉजी और युवाशक्ति

भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है. AI, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रीन एनर्जी इन क्षेत्रों में भारत तेजी से निवेश कर रहा है.

ISRO की उपलब्धियाँ, डिजिटल इंडिया की सफलता और 5G के विस्तार ने भी भारत की भविष्य की क्षमता को मजबूत किया है.

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