अमेरिका समेत 200 देशों को भारत से सप्लाई हो रहीं 5 दवाइयां, जानें किन बीमारियों में काम आती हैं ये मेडिसिन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी ट्रेड पॉलिसी को सख्ती से लागू करते हुए गुरुवार को ट्रूथ सोशल पर पोस्ट के जरिए ब्रांडेड और पेटेंट वाली फार्मा प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की.

India exports medicines to over 200 countries with the US being its largest market
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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी ट्रेड पॉलिसी को सख्ती से लागू करते हुए गुरुवार को ट्रूथ सोशल पर पोस्ट के जरिए ब्रांडेड और पेटेंट वाली फार्मा प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की. यह कदम 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होगा, लेकिन अगर कोई कंपनी अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बना रही है, तो छूट मिलेगी. इससे भारत का फार्मा सेक्टर, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर दवाएं एक्सपोर्ट करता है, फिर से चर्चा में आ गया है. 

भारत-अमेरिका फार्मा व्यापार

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उत्पादक देश है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा बाजार है. यहां जेनेरिक दवाओं से लेकर ब्रांडेड मेडिसिन तक सब कुछ एक्सपोर्ट होता है. ट्रंप का यह टैरिफ केवल ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर लागू होगा, जिससे जेनेरिक एक्सपोर्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. भारत की फार्मा कंपनियां अमेरिका के अलावा यूरोप, ब्रिटेन और अन्य देशों को भी दवाएं भेजती हैं, लेकिन अमेरिका में 40% से ज्यादा एक्सपोर्ट इसी सेक्टर का हिस्सा है.

जेनेरिक दवाओं का दबदबा

भारत से अमेरिका को सबसे ज्यादा जेनेरिक दवाएं जाती हैं, जो किफायती और जरूरी हैं. क्योरटन.इन की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरासिटामोल इनमें टॉप पर है, जो दर्द और बुखार के इलाज में इस्तेमाल होती है. इसके बाद आइबुप्रोफेन (सूजन कम करने वाली), मेटफॉर्मिन (डायबिटीज मैनेजमेंट), एटोरवास्टेटिन (कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल) और ओमेप्राजोल (एसिडिटी और अल्सर की दवा) प्रमुख हैं. ये दवाएं अमेरिकी बाजार में दवाओं की कमी को पूरा करती हैं और ट्रंप के टैरिफ से बचे रहेंगी, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को राहत मिलेगी.

ब्रांडेड दवाओं का एक्सपोर्ट

जेनेरिक के अलावा भारत अमेरिका को जीवन रक्षक ब्रांडेड दवाएं भी एक्सपोर्ट करता है, जैसे एंटीबायोटिक्स, हार्ट की दवाएं, डायबिटीज मैनेजमेंट, पेनकिलर्स, कैंसर थैरेपी, एंटी-वायरल (एचआईवी) और वैक्सीन. कोविड महामारी के दौरान भारत ने कुछ दवाओं के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई थी ताकि घरेलू सप्लाई बनी रहे. अब ट्रंप का 100% टैरिफ इन ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पर लागू होगा, जिससे कीमतें दोगुनी हो सकती हैं और भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में मुश्किल हो सकती है. हालांकि, अगर वे अमेरिका में प्लांट सेटअप करें, तो छूट का फायदा उठा सकती हैं.

वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति

भारतीय फार्मा सेक्टर सालाना करीब 25 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करता है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है. इसके बाद ब्रिटेन, जर्मनी, रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका प्रमुख डेस्टिनेशन हैं. प्रमुख कंपनियां जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, ल्यूपिन, अरबिंदो फार्मा और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज ब्रांडेड दवाओं में लीड करती हैं. यह टैरिफ इन कंपनियों को अमेरिकी निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में एक्सपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी.

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