UN कैसे होगा मजबूत, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दिए 7 सुझाव, क्या होगा बदलाव?

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की पुरजोर मांग की है. भारत का कहना है कि आज की दुनिया 1945 की दुनिया नहीं रही, इसलिए अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सबसे प्रभावशाली अंग सुरक्षा परिषद को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप बदला जाए.

India gave suggestions to strengthen UNSC
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की पुरजोर मांग की है. भारत का कहना है कि आज की दुनिया 1945 की दुनिया नहीं रही, इसलिए अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सबसे प्रभावशाली अंग सुरक्षा परिषद को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप बदला जाए.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने ओपन डिबेट में कहा कि “संयुक्त राष्ट्र को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत करने की जरूरत है.” उन्होंने सुधार की दिशा में सात ठोस सुझाव दिए, जो न केवल विकासशील देशों की आवाज को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र किस तरह एक अधिक प्रतिनिधिक, पारदर्शी और जवाबदेह संस्था बन सकता है.

भारत लंबे समय से ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज उठा रहा है, यानी वे देश जो विकासशील या निम्न आय वाले हैं, परंतु विश्व जनसंख्या के विशाल हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं. भारत का तर्क है कि यदि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, एक परमाणु शक्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है, तो यह संस्था अधूरी मानी जाएगी.

UNSC सुधार की आवश्यकता क्यों?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गठन 1945 में हुआ था, जब दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध से उबर रही थी. उस समय इसकी संरचना उस युग की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित थी. लेकिन अब, 80 वर्ष बाद, दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है.

एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ग्लोबल साउथ के देश आर्थिक और सामरिक रूप से उभर चुके हैं. बावजूद इसके, सुरक्षा परिषद का स्वरूप अब भी कुछ ही देशों- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के स्थायी नियंत्रण में है.

भारत ने कहा कि इस स्थिति में सुधार के बिना संयुक्त राष्ट्र न तो विश्व शांति को कायम रख सकता है और न ही नई वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, आर्थिक असमानता और साइबर सुरक्षा से प्रभावी ढंग से निपट सकता है.

भारत के 7 दमदार सुझाव-

1. पुरानी संरचना को बदलने का समय आ गया है

भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना अब 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती. 1945 की भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बनाई गई यह परिषद 2025 की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकती.

भारत ने मांग की कि परिषद में स्थायी (Permanent) और अस्थायी (Non-permanent) दोनों श्रेणियों में विस्तार किया जाए और यह प्रक्रिया टेक्स्ट-आधारित वार्ताओं (Text-based Negotiations) के माध्यम से तय समयसीमा में पूरी हो.

भारत ने चेतावनी दी कि “सिर्फ प्रक्रियाओं के नाम पर सुधार को टालते रहना वैश्विक दक्षिण के नागरिकों के साथ अन्याय है.”

2. ग्लोबल साउथ को मिले अधिक प्रतिनिधित्व

भारत ने कहा कि ग्लोबल साउथ, यानी विकासशील देशों का समूह, मानवता के विशाल बहुमत का प्रतिनिधित्व करता है.

इन देशों की समस्याएं जैसे गरीबी, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय असमानता विकसित देशों से अलग हैं. इसलिए संयुक्त राष्ट्र की सभी संस्थाओं, एजेंसियों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में इन देशों को अधिक भागीदारी दी जानी चाहिए.

3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग साझेदारी के रूप में देखा जाए

भारत ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अक्सर “दान” के रूप में देखा जाता है. यह सोच गलत है. विकास को किसी देश की दया पर नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी और पारस्परिक सहयोग के रूप में देखा जाना चाहिए.

भारत का मत है कि “यदि प्रगति को सार्वभौमिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाएगा, तो न तो यह नैतिक रूप से टिकाऊ होगी और न व्यावहारिक रूप से सफल.”

4. संयुक्त राष्ट्र को बनाना होगा अधिक सक्षम

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं, खासकर Peacekeeping Operations (शांति सैनिक मिशन), को नए यथार्थ के अनुसार ढालने की जरूरत है.

भारत ने स्पष्ट किया कि शांति सैनिकों को नए प्रकार के संघर्षों और अस्थिर क्षेत्रों में काम करना पड़ रहा है, इसलिए उन्हें आधुनिक उपकरण, तकनीकी सहायता, संसाधन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना जरूरी है. साथ ही, मिशन का जनादेश (Mandate) उन देशों के सुझावों पर आधारित होना चाहिए जो अपने सैनिक भेजते हैं.

5. UN-80 कार्यक्रम को बनाना होगा महत्वाकांक्षी

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का मौजूदा UN-80 सुधार एजेंडा केवल बजट संतुलन या मानव संसाधन पुनर्गठन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. यह एक व्यापक और दूरदर्शी सुधार योजना होनी चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र और उसकी प्रमुख संस्थाओं के वास्तविक ढांचे में बदलाव लाए.

भारत ने सुझाव दिया कि “UN-80 को केवल संरचनात्मक समायोजन नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की नई दिशा तय करने वाला एजेंडा बनना चाहिए.”

6. महासभा को बनाना होगा अधिक सशक्त

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) को अधिक प्रभावी, सशक्त और उद्देश्यपूर्ण बनाने की आवश्यकता है. 

महासभा को सुरक्षा परिषद और अन्य संस्थाओं के साथ बेहतर सहयोग और समन्वय विकसित करना चाहिए. इससे सदस्य देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को वास्तविक रूप में लागू करने में मदद मिलेगी.

7. संकीर्ण राजनीतिक हितों से ऊपर उठें

भारत ने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाना है, तो सदस्य देशों को अपने संकीर्ण राजनीतिक और राष्ट्रीय स्वार्थों से ऊपर उठना होगा. संयुक्त राष्ट्र कोई विभाजनकारी मंच नहीं है, बल्कि यह वैश्विक कल्याण के लिए साझा प्रयासों का केंद्र है.

भारत ने कहा कि एक ऐसी दुनिया में जो दरारों, युद्धों और विभाजनों से ग्रस्त है, संयुक्त राष्ट्र ही वह एकमात्र संस्था है जो मानवता को एक दिशा दे सकती है.

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