क्या भारत को मिलेगी टैरिफ से राहत? जयशंकर-रुबियो के बीच ट्रेड सहित इन मुद्दों पर हुई बातचीत

Marco Rubio S Jaishankar Talk: भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. ऐसे वक्त में जब व्यापारिक तनाव, ऊंचे टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई फोन पर बातचीत को खास माना जा रहा है.

India get relief from tariffs Talks between Jaishankar and Rubio on issues including trade
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Marco Rubio S Jaishankar Talk: भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. ऐसे वक्त में जब व्यापारिक तनाव, ऊंचे टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई फोन पर बातचीत को खास माना जा रहा है. यह बातचीत सिर्फ औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका रिश्तों की दिशा तय करने वाला संकेत भी मानी जा रही है.

मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की. इस बातचीत की जानकारी जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच परमाणु सहयोग, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई.

जयशंकर के अनुसार, बातचीत सिर्फ इन मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आपसी हितों से जुड़े अन्य विषयों पर भी लगातार संपर्क में बने रहने पर सहमति बनी. यह संकेत देता है कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए संवाद के रास्ते खुले रखना चाहते हैं.

ट्रेड डील पर अनिश्चितता के बीच हुआ संवाद

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर अब भी स्थिति साफ नहीं है. दोनों देशों ने पिछले साल फरवरी में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद, व्यापार वार्ता को दोबारा शुरू किया था. उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा था.

हालांकि जुलाई में हालात तब बदल गए जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर एकतरफा 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया. इस फैसले के बाद व्यापार वार्ता ठप पड़ गई और दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया.

रूसी तेल और बढ़ते टैरिफ का विवाद

अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया. इस तरह भारत पर कुल टैरिफ बोझ 50 फीसदी तक पहुंच गया, जो एशिया में सबसे अधिक माना जा रहा है. इस कदम को भारत ने अनुचित बताया था, वहीं अमेरिका ने इसे रणनीतिक दबाव के तौर पर देखा. इसी पृष्ठभूमि में जयशंकर और रुबियो की बातचीत को दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

अमेरिकी राजदूत का बयान, बातचीत को बताया सकारात्मक

भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस बातचीत को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत हुई है.

उनके मुताबिक, दोनों नेताओं ने व्यापार वार्ता, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और अगले महीने संभावित ट्रेड डील को लेकर होने वाली बैठक पर चर्चा की. यह बयान इस ओर इशारा करता है कि दोनों देश व्यापार समझौते को लेकर फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बढ़ी सक्रियता

सर्जियो गोर ने इससे एक दिन पहले, 12 जनवरी को कहा था कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील को लेकर गंभीरता से और सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने माना कि भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश के साथ समझौता करना आसान नहीं है, लेकिन दोनों पक्ष मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार भारत-अमेरिका रिश्तों का अहम स्तंभ है, लेकिन इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम करते रहेंगे.

भविष्य की साझेदारी और नए मंचों की तैयारी

सर्जियो गोर के बयान में यह संकेत भी दिया गया कि भारत को अगले महीने पैक्ससिलिका में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. इसे भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ते भरोसे और रणनीतिक साझेदारी के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है.

कुल मिलाकर, जयशंकर और रुबियो की बातचीत यह बताती है कि तमाम मतभेदों और तनावों के बावजूद भारत और अमेरिका अपने रिश्तों को पूरी तरह टूटने नहीं देना चाहते. आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि यह संवाद सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता था या वास्तव में किसी बड़े समझौते की नींव.

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