India-Mongolia Relations: भारत और मंगोलिया के संबंधों में हाल ही में एक नया अध्याय जुड़ गया, जब मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना ने भारत की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. यह द्विपक्षीय वार्ता कई मायनों में ऐतिहासिक रही, क्योंकि इसमें शिक्षा, ऊर्जा, संस्कृति, रक्षा और डिजिटल सहयोग जैसे विविध क्षेत्रों में गहन चर्चा हुई. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 6 महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर भी हस्ताक्षर हुए, जो आगे आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएंगे.
PM मोदी और राष्ट्रपति खुरेलसुख के बीच जो बातचीत हुई, वह केवल राजनीतिक या कूटनीतिक मसलों तक सीमित नहीं रही. इसमें मानवीय सहायता, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की मरम्मत, खनिज संसाधनों की खोज, आप्रवासन नीति और डिजिटल तकनीक जैसे व्यापक विषयों को शामिल किया गया. दोनों देशों ने साझा मूल्यों और बौद्धिक विरासत को ध्यान में रखते हुए आपसी सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प जताया.
Happy to have welcomed President Khurelsukh and held extensive talks with him in Delhi today. His visit comes at a time when India and Mongolia are marking 70 years of diplomatic ties and a decade of our Strategic Partnership. We agreed to keep working together to further amplify… pic.twitter.com/FeIsEJxYh9
— Narendra Modi (@narendramodi) October 14, 2025
6 महत्वपूर्ण समझौते जिन पर हस्ताक्षर हुए:
मंगोलिया में भारत की मदद से बन रही तेल रिफाइनरी
भारत द्वारा मंगोलिया में बनाई जा रही तेल रिफाइनरी इस सहयोग का एक प्रमुख आर्थिक पहलू है. यह रिफाइनरी $1.7 बिलियन (लगभग ₹17,000 करोड़) की भारतीय लोन सहायता से बन रही है और इसके 2028 तक पूर्ण रूप से चालू होने की उम्मीद है. इससे मंगोलिया को हर साल 15 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता मिलेगी, यानी करीब 30,000 बैरल प्रतिदिन.
इस परियोजना से न केवल मंगोलिया की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि भारत की वहां की तेल और गैस खोज में भागीदारी के नए रास्ते भी खुलेंगे. मंगोलिया ने विशेष तौर पर भारतीय कंपनियों को ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन में निवेश के लिए आमंत्रित किया है.
मंगोलियाई नागरिकों को मिलेगा मुफ्त ई-वीजा
एक बड़ी घोषणा करते हुए PM मोदी ने बताया कि अब मंगोलियाई नागरिकों को भारत आने के लिए ई-वीजा मुफ्त में मिलेगा. इस कदम से भारत आने वाले पर्यटकों, छात्रों और व्यापारियों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है. इससे दोनों देशों के बीच लोगों का आपसी संपर्क और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे.
लद्दाख और अरखांगई प्रांत के बीच स्थानीय साझेदारी
भारत के लद्दाख क्षेत्र और मंगोलिया के अरखांगई प्रांत के बीच एक नया स्थानीय सहयोग समझौता भी किया गया है. इसका उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और पर्यटन सहयोग को बढ़ावा देना है. इससे दोनों पक्षों को जमीनी स्तर पर एक-दूसरे से सीखने और पारंपरिक ज्ञान को साझा करने का अवसर मिलेगा.
बौद्ध विरासत के जरिए गहराता आध्यात्मिक रिश्ता
PM मोदी ने इस मुलाकात के दौरान यह भी दोहराया कि भारत और मंगोलिया के बीच का रिश्ता केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि दोनों देश सदियों से बौद्ध धर्म के साझा सूत्र में बंधे हैं, जो हमें “स्पिरिचुअल सिबलिंग्स (आध्यात्मिक भाई-बहन)” बनाता है.
इसी भावना के तहत, भारत अगले वर्ष भगवान बुद्ध के दो महान शिष्यों, सारिपुत्र और मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया भेजेगा. यह कदम बौद्ध विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ दोनों देशों के धार्मिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा.
शिक्षा और धार्मिक संस्थानों के बीच साझेदारी
भारत और मंगोलिया के बीच शैक्षिक एवं धार्मिक संस्थानों के आपसी सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मंगोलिया के प्रसिद्ध गंदन मठ और भारत के नालंदा विश्वविद्यालय के बीच एक विशेष साझेदारी स्थापित की गई है. इसके अलावा भारत मंगोलिया के युवाओं को "संस्कृति राजदूत" बनने का अवसर देगा, जिससे वे भारत आकर भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नजदीक से जान सकें.
मंगोलियाई सीमा बलों को भारत देगा ट्रेनिंग
रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाते हुए भारत मंगोलिया के सीमा सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने की योजना भी शुरू करेगा. यह सहयोग सैन्य प्रशिक्षण, रणनीति, और सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में होगा, जिससे मंगोलिया की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा.
10 साल की रणनीतिक साझेदारी और 70 साल के राजनयिक संबंध
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और मंगोलिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष और राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का भी जश्न मनाया. इस अवसर पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मिलकर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया, जो इस सहयोग की गहराई और ऐतिहासिकता को दर्शाता है.
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