जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक, रणनीतिक और अब आर्थिक मोर्चे पर सख्त रुख अपना लिया है. भारत सरकार ने अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति को उजागर करते हुए बड़ा कदम उठाया है. सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से पाकिस्तान को दिए जा रहे कर्जों की समीक्षा करने की मांग की है.
IMF की फंडिंग को लेकर भारत की चिंता ऐसे वक्त में सामने आई है जब पाकिस्तान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है और IMF से मिले बेलआउट पैकेज के सहारे ही उसका बजट संतुलन बना हुआ है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत की यह सिफारिश असर करती है, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को करारा झटका लग सकता है.
पाकिस्तान के लिए एक और झटका?
22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पहले ही कई ठोस फैसले लिए हैं. जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना, वीजा सेवाएं बंद करना, और पाकिस्तान स्थित उच्चायोग की गतिविधियों को सीमित करना शामिल है. अब इस क्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक दबाव बनाने की तैयारी की जा रही है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में भारत सरकार के वरिष्ठ सूत्र के हवाले से बताया गया है कि भारत ने IMF से अनुरोध किया है कि वह पाकिस्तान को दी गई वित्तीय सहायता का पुनर्मूल्यांकन करे, खासकर उस सहायता का जो उसे जलवायु परिवर्तन और आपदा लचीलापन के नाम पर मिली है.
IMF से मिली थी बड़ी राहत
गौरतलब है कि पाकिस्तान को पिछले वर्ष IMF से लगभग 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिला था, जिसमें हाल ही में 1.3 अरब डॉलर की एक नई सहायता राशि भी शामिल है. ये कर्ज पाकिस्तान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए स्थिर करने में मददगार साबित हुआ था. लेकिन अब अगर इस सहायता पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर सीधे पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार और कर्ज भुगतान क्षमता पर पड़ेगा.
कूटनीतिक दबाव के साथ आर्थिक मोर्चेबंदी
इस बीच भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत का यह नया कदम पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने और उसे आंतरिक रूप से अस्थिर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. भारत ने IMF को यह संदेश देने की कोशिश की है कि आतंकी गतिविधियों की पनाहगाह को आर्थिक मदद देना वैश्विक स्थिरता के खिलाफ है.