एक बटन दबाते लाहौर साफ! ₹78217 करोड़ की डिफेंस डील की तैयारी में भारत, मिलेंगे कई खतरनाक हथियार

भारत का रक्षा क्षेत्र लंबे समय तक विदेशी हथियारों की खरीद पर निर्भर रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला है.

India preparing for defense deal worth ₹78217 crore
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

भारत का रक्षा क्षेत्र लंबे समय तक विदेशी हथियारों की खरीद पर निर्भर रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति के तहत अब देश न केवल अपनी सैन्य जरूरतें खुद पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में भी एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है. इसके आंकड़े और हालिया फैसले इस बदलाव की साफ तस्वीर पेश करते हैं.

भारत की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा चुनौतियां किसी से छिपी नहीं हैं. पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और पूर्वी सीमा पर चीन दोनों ही देशों के साथ भारत के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं. इतिहास गवाह है कि इन मोर्चों पर भारत को कई बार सैन्य टकराव का सामना करना पड़ा है. ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहे.

बदला सामरिक माहौल, तेज हुई सैन्य तैयारी

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद भारत के रणनीतिक नजरिए में और स्पष्टता आई है. मित्र और शत्रु की पहचान पहले से ज्यादा साफ हो चुकी है. इसी बदले हुए सुरक्षा माहौल को देखते हुए भारत ने अपनी थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों को आधुनिक और ताकतवर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है.

  • नौसेना में हर छह सप्ताह में एक नए युद्धपोत को बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है
  • थलसेना ड्रोन फ्लीट और आधुनिक निगरानी सिस्टम विकसित कर रही है
  • वायुसेना के लिए फाइटर जेट्स, एयर-टू-एयर और एयर-टू-सर्फेस मिसाइल, प्रिसीजन गाइडेड बम और एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम लगातार जोड़े जा रहे हैं

इसी कड़ी में अब भारत एक और बड़े रक्षा सौदे की तैयारी कर रहा है, जो वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है.

इज़राइल के साथ मेगा डिफेंस डील की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है. इंडियन डिफेंस न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इज़राइल से करीब 8.7 अरब डॉलर (लगभग ₹78,217 करोड़) की अत्याधुनिक मिसाइल और हथियार प्रणाली खरीदने की तैयारी में है.

इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) से मंजूरी मिल चुकी है. यह सौदा ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत को सीमाओं पर कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

एक तरफ LAC पर चीन की मजबूत एयर डिफेंस तैनाती, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से GPS जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल—खासतौर पर मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है. ऐसे में यह डील भारत की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप मानी जा रही है.

इज़राइल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार बना भारत

आंकड़े बताते हैं कि 2020 से 2024 के बीच इज़राइल के कुल रक्षा निर्यात का 34 प्रतिशत हिस्सा भारत को गया, जिससे भारत इज़राइल का सबसे बड़ा डिफेंस कस्टमर बन गया है. इस नए पैकेज में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि एयर-टू-एयर मिसाइल, लोइटरिंग म्यूनिशन, एडवांस रडार, सिमुलेटर और नेटवर्क-आधारित कमांड सिस्टम भी शामिल हैं.

कौन-कौन से घातक हथियार होंगे शामिल?

इस डील के तहत भारतीय वायुसेना को कई लॉन्ग-रेंज और हाई-प्रिसीजन हथियार मिलेंगे, जो दुश्मन के ठिकानों पर सैकड़ों किलोमीटर दूर से हमला करने में सक्षम हैं.

रैम्पेज मिसाइल: पहले से आज़माया हुआ हथियार

रैम्पेज मिसाइल, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है, पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के बेड़े में शामिल है.

  • यह Su-30MKI, MiG-29, Jaguar और MiG-29K जैसे फाइटर जेट्स से दागी जा सकती है
  • वजन करीब 570 किलोग्राम
  • GPS/INS गाइडेंस और एंटी-जैमिंग क्षमता से लैस
  • दुश्मन के एयरबेस, बंकर, कंट्रोल टावर और लॉजिस्टिक हब पर सटीक वार में सक्षम

ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान इसकी प्रभावशीलता देखी जा चुकी है.

एयर LORA: 400 किमी दूर से सटीक स्ट्राइक

एयर LORA एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से दागी जाने वाली LORA मिसाइल का उन्नत संस्करण है.

भारत में इसका निर्माण पहले से BEL और IAI के सहयोग से किया जा रहा है

  • मारक दूरी: 400 से 430 किलोमीटर
  • CEP (त्रुटि सीमा): 10 मीटर से भी कम
  • वजन: लगभग 1600 किलोग्राम
  • रफ्तार: मैक-5 (6000 किमी/घंटा से अधिक)

यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल बेस और सैन्य ठिकानों को नष्ट करने में बेहद प्रभावी मानी जाती है.

आइस ब्रेकर: GPS जैमिंग के बावजूद सटीक हमला

राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित आइस ब्रेकर मिसाइल को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

  • वजन 400 किलोग्राम से कम
  • मारक दूरी: लगभग 300 किलोमीटर
  • लो-लेवल फ्लाइट प्रोफाइल
  • AI-आधारित टारगेट रिकग्निशन
  • GPS न मिलने पर भी लक्ष्य पहचानने की क्षमता
  • स्टील्थ डिजाइन और कम रडार सिग्नेचर

यह मिसाइल दुश्मन की मजबूत एयर डिफेंस को चकमा देकर लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है.

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

इस सौदे की सबसे अहम बात यह है कि 2025 के अंत तक पूरी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पर सहमति बन चुकी है.

  • BEL इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सिस्टम संभालेगी
  • HAL विमानों में आइस ब्रेकर मिसाइल के इंटीग्रेशन का काम करेगी
  • DRDO तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा

इससे भारत में ही इन मिसाइलों का निर्माण संभव होगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बड़ी मजबूती मिलेगी.

भारतीय वायुसेना को क्या मिलेगा फायदा?

इन हथियारों के शामिल होने से:

  • वायुसेना की डीप-स्ट्राइक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा
  • पायलटों का जोखिम कम होगा
  • Su-30MKI, MiG-29K के साथ-साथ तेजस जैसे स्वदेशी फाइटर जेट भी ज्यादा प्रभावी बनेंगे

करीब 20 अरब डॉलर के एयरोस्पेस पैकेज का हिस्सा माने जा रहे इस प्रस्ताव को 2026 के मध्य तक कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलने की उम्मीद है. इसके बाद भारत इन हथियार प्रणालियों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मित्र देशों को निर्यात करने की दिशा में भी कदम बढ़ा सकता है.

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