भारत अब एक और ऐतिहासिक कदम उठाने को तैयार है. दीपावली के बाद देश को एक अनोखी सौगात मिलने जा रही है, भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन. हरियाणा के सोनीपत-गोहाना-जींद रूट पर यह ग्रीन ट्रेन दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है. हाइड्रोजन गैस से चलने वाली यह ट्रेन न केवल भारत को विश्व के चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा योगदान देगी.
क्यों खास है हाइड्रोजन ट्रेन?
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली से नहीं, बल्कि हाइड्रोजन ईंधन से चलेगी. इसका मतलब है कि इस ट्रेन के चलने पर कोई प्रदूषण नहीं होगा, और इससे केवल जलवाष्प और गर्मी उत्पन्न होगी. भारत सरकार की ओर से इसे "नमो ग्रीन रेल" का नाम दिया गया है, जो इसे पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनाता है.
पहली हाइड्रोजन ट्रेन कहां चलेगी?
यह ट्रेन सोनीपत, गोहाना और जींद के बीच लगभग 89 किलोमीटर लंबे रूट पर दौड़ेगी. इसकी रफ्तार 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी, जिससे यह तेज़ और समयबद्ध यात्रा का एक नया विकल्प बनेगी.
कहां हुआ निर्माण और कैसे चल रही है तैयारी?
इस ट्रेन के इंजन और बोगियां लखनऊ में बनकर तैयार की गईं, और फिलहाल यह दिल्ली के शकूर बस्ती यार्ड में खड़ी है. जींद में स्थित हाइड्रोजन प्लांट में ईंधन भरने और तकनीकी परीक्षण का कार्य अंतिम चरण में है. इसके बाद रेलवे की अन्य शाखाएं परीक्षण करेंगी, जिसकी प्रक्रिया में लगभग 10 दिन का समय लगेगा. यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अक्टूबर के अंत तक यह ट्रेन पटरियों पर दौड़ने लगेगी.
कितना खर्च और कितनी क्षमता?
इस परियोजना पर कुल अनुमानित खर्च 120 करोड़ रुपये है. इस ट्रेन में 08 कोच हैं और यह एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखती है, जो इसे एक कुशल और व्यावसायिक समाधान बनाती है.
कहां से होगी हाइड्रोजन की सप्लाई?
हाइड्रोजन की सप्लाई के लिए जींद में 1 मेगावाट क्षमता का PEM (पॉलिमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन) इलेक्ट्रोलाइजर लगाया गया है, जो रोजाना लगभग 430 किलोग्राम हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा. इसके साथ ही हाइड्रोजन के भंडारण और वितरण के लिए उन्नत बुनियादी ढांचे की स्थापना की गई है – जैसे कि 3000 किलोग्राम स्टोरेज, हाइड्रोजन कंप्रेसर और डिस्पेंसर.
किन देशों में पहले से चल रही हैं हाइड्रोजन ट्रेनें?
भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का पांचवां देश बनने जा रहा है. इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं.
क्या है हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक?
हाइड्रोजन ट्रेनें एक प्रकार की फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करती हैं, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है. इससे ट्रेन को चलाने के लिए किसी बाहरी ईंधन या ग्रिड बिजली की आवश्यकता नहीं होती. इससे ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पूरी तरह हरित और टिकाऊ बनता है.
भविष्य की दिशा में बड़ा कदम
रेलवे मंत्रालय द्वारा की जा रही यह पहल भारतीय रेलवे को "नेट ज़ीरो एमिशन" की ओर ले जाने की रणनीति का हिस्सा है. चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में भी हाइड्रोजन संचालित कोच का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है.
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