भारत अपनी रक्षा तकनीक को आने वाले वर्षों में पूरी तरह स्वदेशी बनाने के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है. चाहे फाइटर जेट हों, मिसाइल सिस्टम हों या एडवांस राडार, सरकार का उद्देश्य है कि देश आने वाले दशक में रक्षा उत्पादन के बड़े हिस्से में आत्मनिर्भर बन जाए. इसी दिशा में DRDO को कई अहम प्रोजेक्ट सौंपे गए हैं, जिनमें सबसे ताज़ा सफलता है लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम ‘गौरव’ का सफल परीक्षण.
यह ग्लाइड बम भविष्य के हवाई युद्ध के लिए विकसित एक महत्वपूर्ण हथियार है, जो लड़ाकू विमान से लॉन्च होकर कई दर्जन किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को उच्च सटीकता के साथ भेद सकता है. इसके कारण भारतीय वायुसेना अब दुश्मन की वायु रक्षा सीमा में घुसे बिना ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ कर सकती है, यानि सुरक्षित दूरी से संदेशात्मक और रणनीतिक दोनों तरह के हमले संभव होंगे.
स्वदेशी हथियार तकनीक में भारत की बड़ी छलांग
21वीं सदी का युद्ध पूरी तरह बदल चुका है. पहले जहां जमीनी युद्ध मुख्य भूमिका में थे, आज हवाई और मिसाइल आधारित हमले निर्णायक बन चुके हैं. इसी वजह से भारत ने स्वदेशी एयर-टू-सरफेस हथियारों पर अपना ध्यान बढ़ा दिया है.
देशी लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में इंजन आपूर्ति जैसी चुनौतियाँ थीं, जिससे सरकार ने घरेलू स्तर पर जेट इंजन निर्माण का काम तेज कर दिया है. इसी के समानांतर मिसाइल, एयर डिफेंस और लांगरेंज अटैक सिस्टम तेजी से विकसित किए जा रहे हैं.
इसी रफ्तार में DRDO ने लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB) के सफल ट्रायल से भारत की वायु शक्ति को एक नई दिशा दी है.
कैसे हुआ परीक्षण और क्यों है यह हथियार खास?
गौरव ग्लाइड बम को भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक Su-30MKI लड़ाकू विमान से लॉन्च किया गया. DRDO के अनुसार बम के परीक्षण दो चरणों में किए गए:
• पहला चरण: कैरेज ट्रायल
इस ट्रायल में बम को विमान पर लगाकर उड़ान भरी गई ताकि इसकी स्थिरता, सुरक्षा और इंजन तथा संरचना पर प्रभाव की जांच हो सके. यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा.
• दूसरा चरण: रिलीज़ और फ्लाइट ट्रायल
इसमें यह देखा गया कि
दोनों ट्रायल सफल रहने के बाद इसे आगे की प्रक्रियाओं के लिए उपयुक्त माना गया.
गौरव की प्रमुख विशेषताएँ
गौरव ग्लाइड बम के कई ऐसे गुण हैं जो इसे एक महत्वपूर्ण हथियार प्रणाली बनाते हैं:
• दुश्मन की एयर डिफेंस से बाहर से वार
यह हथियार लंबी दूरी से अपना लक्ष्य भेद सकता है, जिससे लड़ाकू विमान दुश्मन की मिसाइल रेंज में प्रवेश किए बिना हमला कर सकते हैं.
• क्रूज़ मिसाइलों का आर्थिक विकल्प
ब्रह्मोस जैसी क्रूज़ मिसाइलें शक्तिशाली हैं, लेकिन उनका उपयोग हमेशा जरूरी या लॉजिस्टिक रूप से किफायती नहीं होता. गौरव बम कम लागत में समान प्रकार की ‘स्टैंड-ऑफ अटैक’ क्षमता प्रदान करता है.
• 1000 किलो के वारहेड का बड़ा असर
इसका भारी वजन इसे गहरा प्रभाव डालने वाला हथियार बनाता है, जो कठोर संरचनाओं से लेकर खुले ठिकानों तक व्यापक प्रकार के लक्ष्यों पर इस्तेमाल हो सकता है.
• भारतीय वायुसेना की पूरी Su-30MKI फ्लीट में उपयोग
इसे ऐसे डिज़ाइन किया गया है कि वायुसेना के अधिकतर Su-30 विमान इसे अपनी मिशन आवश्यकताओं के अनुसार तेजी से इंटीग्रेट कर सकते हैं.
दो घातक वेरिएंट: दो तरह के युद्ध के लिए तैयार
गौरव ग्लाइड बम को दो अलग-अलग वारहेड के साथ विकसित किया गया है:
1. Pre-Fragmented Blast (PF) वेरिएंट
2. Penetration-cum-Blast (PCB) वेरिएंट
PCB वेरिएंट 2024 में अपने प्रमुख विकास चरण पूरे कर चुका है और इसे रणनीतिक मिशनों के लिए अत्यंत प्रभावी बताया जा रहा है.
भारतीय वायुसेना के लिए नई रणनीतिक क्षमता
गौरव ग्लाइड बम के आने से भारतीय वायुसेना के पास पहले से मौजूद कई आधुनिक हथियारों की श्रृंखला और मजबूत हो गई है:
इन हथियारों के साथ गौरव ग्लाइड बम मिलकर वायुसेना को ‘मल्टी-लेयर स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ क्षमता देते हैं, यानि अलग-अलग रेंज, अलग-अलग हालात और अलग-अलग दुश्मन लक्ष्यों पर अलग-अलग तरह की सटीक कार्रवाई संभव होती है.
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