बेलेम से भारत का संदेश, “जलवायु न्याय के बिना कोई भी सम्मेलन अधूरा” – COP30 पर नई भूमिका

ब्राज़ील के अमेजन क्षेत्र के शहर बेलेम में आयोजित COP30 जलवायु सम्मेलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इस मंच पर भारत की भूमिका एक बार फिर बेहद मजबूत और स्पष्ट दिखाई दी.

India Supports Brazil Over cop 30 advocate
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ब्राज़ील के अमेजन क्षेत्र के शहर बेलेम में आयोजित COP30 जलवायु सम्मेलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इस मंच पर भारत की भूमिका एक बार फिर बेहद मजबूत और स्पष्ट दिखाई दी. दुनिया भर के 194 देशों की मौजूदगी में भारत ने न केवल ब्राज़ील की आगामी COP अध्यक्षता को खुलकर समर्थन दिया, बल्कि जलवायु न्याय, वित्तीय सहायता और विकासशील देशों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर निर्णायक आवाज उठाई.

भारत ने कहा कि COP30 में हुई प्रगति स्वागत योग्य है, लेकिन इसे ‘निर्णायक सफलता’ कहना अभी जल्दबाज़ी होगी. दुनिया जिस तेज़ी से जलवायु संकट की चपेट में आ रही है, उसके मुकाबले कदम अभी भी काफी धीमे हैं.

विकासशील देशों के लिए वित्त पर नई उम्मीदें

भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने UNFCCC के समापन सत्र में मुख्य वक्तव्य दिया. उन्होंने बताया कि दो सप्ताह चली इस जलवायु वार्ता का सबसे अहम परिणाम यह रहा कि विकसित देशों ने अंततः अत्यधिक मौसमी आपदाओं से जूझ रहे विकासशील देशों को अधिक वित्तीय सहायता देने का वादा किया है. हालांकि, भारत ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि फॉसिल फ्यूल फेज-आउट को लेकर कोई ठोस योजना अभी भी सामने नहीं आई है. फिर भी भारत ने COP30 के अध्यक्ष आंद्रे कोर्रिया दो लागो और उनकी टीम के नेतृत्व को सराहा—विशेषकर इस बात के लिए कि ग्लोबल गोल ऑन एडाप्टेशन (GGA) के तहत विकासशील देशों की अनुकूलन जरूरतों को प्रमुखता दी गई.

पेरिस समझौते के वादों की याद दिलाई

भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकसित देशों को पेरिस समझौते के अनुच्छेद 9.1 के तहत जलवायु वित्त से जुड़े अपने दायित्वों को अब और टालना नहीं चाहिए. भारत ने 1992 में रियो सम्मेलन में किए गए वादों को याद दिलाते हुए कहा “33 साल बाद बेलेम से उम्मीद है कि ये वादे आखिरकार पूरे होंगे.”इसी के साथ भारत ने ‘जस्ट ट्रांजिशन’ तंत्र को भी ऐतिहासिक कदम बताया—जो वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु समानता को मजबूत करेगा.

यूरोपीय व्यापार-पाबंदियों पर भारत का सख्त रुख

भारत ने COP मंच पर यह मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया कि EU का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) एकतरफा और अनुचित है. भारत ने कहा कि ऐसे उपाय पेरिस समझौते के मूल सिद्धांत. CBDR-RC (Common But Differentiated Responsibilities – Respective Capabilities) के खिलाफ हैं, क्योंकि ये विकासशील देशों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं. भारत के अनुसार जलवायु नीतियों के नाम पर व्यापार बाधाएं बनाना न तो न्यायसंगत है और न ही प्रभावी.

ग्लोबल साउथ के लिए भारत की मजबूत आवाज

भारत ने फिर दोहराया कि जलवायु संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार देश ही आज सबसे ज्यादा पीड़ित हैं. इसलिए ग्लोबल साउथ पर किसी भी तरह का अतिरिक्त न्यूनीकरण (mitigation) दबाव डाला जाना अनुचित है.

भारत ने दुनिया से आग्रह किया

“जिन पर सबसे कम जिम्मेदारी है, उन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है—और वैश्विक समुदाय को यह मदद तुरंत देनी चाहिए.”

जलवायु न्याय और समावेशिता पर भारत का वचन

भारत ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि वह वैज्ञानिक, पारदर्शी, न्यायसंगत और समावेशी जलवायु कार्रवाई के प्रति कटिबद्ध है. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्राजील और अन्य देशों के साथ मिलकर एक ऐसी दुनिया की दिशा में काम करने का संकल्प दोहराया जो न्याय, एकजुटता और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित हो.

बेलेम में 10 से 21 नवंबर तक चले COP30 के दौरान 20 नवंबर को आग लगने की घटना में 27 लोग घायल हुए थे, लेकिन सम्मेलन अंत तक चलता रहा और कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. भारत की सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर साबित किया कि जलवायु मुद्दों पर दुनिया को यदि कोई मार्गदर्शन दे सकता है तो वह उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक आवाज है—और उस आवाज का नेतृत्व भारत कर रहा है.

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