जब राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर हो, तो फैसले कड़े और बेधड़क होने चाहिए — और भारत ने यही करके दिखाया है. पाकिस्तान के साथ हालिया सैन्य तनाव और ऑपरेशन 'सिंदूर' की रणनीतिक सफलता के बाद भारत ने रूस से अधिक S-400 ट्रायम्फ मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति का अनुरोध किया है. रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो रूस ने इस मांग पर सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है. यह फैसला भारत की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को अगले स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
रूस से गहरा होता रणनीतिक रिश्ता
भारत और रूस के बीच 35,000 करोड़ रुपये की S-400 डील वर्ष 2018 में हुई थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति में अंजाम दिया गया. उस समय अमेरिका की तरफ से CAATSA (Countering America's Adversaries Through Sanctions Act) के तहत प्रतिबंधों की धमकी दी गई थी, लेकिन भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देते हुए इस दबाव को सिरे से नकार दिया.
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका
7 मई को हुए ऑपरेशन सिंदूर में S-400 डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान की ओर से छोड़े गए ड्रोन स्क्वाड्रनों को लक्ष्य भेदकर हवा में ही खत्म कर दिया. यह उसी क्षण था जब भारत ने तय किया कि उसे और मजबूत सुरक्षा कवच की आवश्यकता है. S-400 प्रणाली अब देश के तीन फ्रंटलाइन स्क्वाड्रनों में तैनात है. इसकी तैनाती पाकिस्तान और चीन के साथ लगी सीमाओं पर है.
मल्टी-लेयर एयर डिफेंस ग्रिड
भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली अब केवल एक मिसाइल या रडार तक सीमित नहीं है. इसमें बराक-8 मिसाइलें, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम DRDO के स्वदेशी एंटी-ड्रोन उपकरण और यूएएस काउंटर ग्रिड टेक्नोलॉजी शामिल है. इन सभी ने पाकिस्तान के व्यापक हमले के प्रयास को नाकाम करते हुए 15 से अधिक भारतीय शहरों को बचाया — जिनमें श्रीनगर, अमृतसर, आदमपुर, भुज और चंडीगढ़ जैसे संवेदनशील ठिकाने शामिल थे.
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