'पाकिस्तान को फाइटर जेट इंजन देने से भारत का होगा फायदा...' रूसी डिफेंस एक्सपर्ट्स ने बताया कैसे?

हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं कूटनीतिक चर्चाओं में एक नई बहस छिड़ी है. खबरें आईं कि रूस पाकिस्तान को JF-17 थंडर फाइटर जेट के लिए RD-93MA इंजन की आपूर्ति करने जा रहा है.

India will benefit by providing fighter jet engines to Pakistan
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हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं कूटनीतिक चर्चाओं में एक नई बहस छिड़ी है. खबरें आईं कि रूस पाकिस्तान को JF-17 थंडर फाइटर जेट के लिए RD-93MA इंजन की आपूर्ति करने जा रहा है. इस खबर ने भारत में राजनीतिक पारा गर्म कर दिया है, खासकर विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को इस मामले में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा. लेकिन रूस के रक्षा विशेषज्ञों ने इस खबर को एक अलग नजरिये से देखा है और दावा किया है कि इस सप्लाई से भारत को वास्तव में कुछ फायदे हो सकते हैं.

RD-93 इंजन रूस के Klimov संयंत्र द्वारा विकसित एक हल्का जेट इंजन है, जो विशेष रूप से JF-17 थंडर और चीन के FC-1 फाइटर विमानों के लिए डिजाइन किया गया है. यह इंजन RD-33 का एक संशोधित संस्करण है, जो MiG-29 जैसे लड़ाकू विमानों में उपयोग किया जाता है. RD-93 इंजन की खासियत है कि यह अधिक थ्रस्ट प्रदान करता है, लेकिन इसकी सेवा अवधि RD-33 इंजन की तुलना में कम होती है.

राजनीतिक और सामरिक परिदृश्य

भारत में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने रूस द्वारा पाकिस्तान को RD-93 इंजन सप्लाई करने की खबरों को कूटनीतिक विफलता बताया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा कि भारत का प्रमुख सैन्य साझेदार रूस पाकिस्तान को हथियार सप्लाई क्यों कर रहा है. इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे “गैरजिम्मेदाराना सूचना युद्ध” करार दिया और विपक्ष पर देश की सुरक्षा हितों के खिलाफ चलने का आरोप लगाया.

रूस के रक्षा विशेषज्ञ की राय: भारत के लिए फायदे

मॉस्को के प्रतिष्ठित प्रिमाकोव इंस्टीट्यूट के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया अनुभाग के प्रमुख प्योत्र तोपीचकानोव ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर रूस पाकिस्तान को RD-93 इंजन सप्लाई कर भी रहा है तो इससे भारत को कम से कम दो बड़े फायदे हो सकते हैं.

1. चीन और पाकिस्तान की निर्भरता का खुलासा

तोपीचकानोव के अनुसार, यह स्पष्ट संकेत है कि चीन और पाकिस्तान अभी तक अपने जेट इंजन प्रौद्योगिकी को विकसित करने में सफल नहीं हुए हैं और वे रूसी इंजनों पर ही निर्भर हैं. इस निर्भरता का मतलब है कि उनका रक्षा उपकरण एक सीमित तकनीकी दायरे में बंधा हुआ है, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है.

2. परिचालन एवं तकनीकी समझ में बढ़ोतरी

भारत पहले ही मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान JF-17 के परिचालन उपयोग का सामना कर चुका है. इससे भारतीय वायुसेना को उस विमान और उसके इंजन के प्रदर्शन का अनुमान लगाना आसान हुआ है. दोनों पक्षों के लड़ाकू विमानों में समान इंजन होने से भारत को उनके संचालन, ताकत और कमजोरियों का अधिक अच्छा ज्ञान मिलेगा.

तकनीकी हस्तांतरण (ToT) की असंभवता

एक अन्य रक्षा विशेषज्ञ, जिनका नाम गोपनीय रखा गया है, ने बताया कि रूस ने भारत को RD-33 इंजन का लाइसेंस जारी किया है, जो पाकिस्तान को दिए गए RD-93 इंजन की तुलना में अधिक उन्नत और भरोसेमंद है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को RD-93 इंजन के साथ कोई तकनीकी हस्तांतरण (ToT) नहीं मिल रहा है, जिससे पाकिस्तान की इंजीनियरिंग क्षमताएं सीमित रहेंगी.

पाकिस्तान की मांग: नया RD-93 इंजन

RD-93 इंजन के मूल संस्करण की सेवा अवधि लगभग 2200 घंटे है, जो कि RD-33 के 4000 घंटे की तुलना में कम है. पाकिस्तान और उसके सहयोगी चीन इस इंजन का एक नया संशोधित संस्करण विकसित करने की मांग कर रहे हैं, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है. इस इंजन के विकास और सप्लाई की प्रक्रिया में रूस की भूमिका महत्वपूर्ण है.

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